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सुना है क्या: "पद खाली नहीं, दावेदारों की भीड़", "न्योता देना और स्वीकार करना", "प्रमोशन के इंतजार में अफसर"
Wed, 14 Oct 2026 12:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:13 PM IST
यूपी के प्रशासनिक गलियारों में अफसरों के प्रमोशन और उसके बाद खाली कुर्सी को पाने के लिए जमकर खींचतान हो रही है। वहीं, प्रदेश में चुनावी बयार के धीरे-धीरे बहने से टीमें दिनरात काम में जुटी हुई हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
यूपी के प्रशासनिक गलियारों में अफसरों के प्रमोशन और उसके बाद खाली कुर्सी को पाने के लिए जमकर खींचतान हो रही है। वहीं, प्रदेश में चुनावी बयार के धीरे-धीरे बहने से टीमें दिनरात काम में जुटी हुई हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
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पद खाली नहीं, दावेदारों की भीड़
सेहत सुधार से जुड़े एक विभाग में प्रदेश मुख्यालय के पद पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। वरिष्ठ डॉक्टर के लिए बने इस पद पर तैनात होने वाले को मरीज नहीं देखना पड़ता है बल्कि वह डॉक्टर को डॉक्टर होने का प्रमाणपत्र देता है। इस पद के खाली होने की संभावना है। ऐसे में पद के दावेदार डॉक्टरों की भीड़ लग गई है। कई डॉक्टर इस पद के लिए एडवांस में आला अफसर के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं तो कुछ ने अफसर के शागिर्दों को चढ़ावा भी चढ़ाना शुरू कर दिया है। अब देखना यह है कि पद कब खाली होता है और दावेदारों की मुराद कब पूरी होती है?
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न्योता देना और स्वीकार करना
चुनावी बयार मंद-मंद बहनी शुरू हो गई है। एक तरफ वार-पलटवार चल रहा है तो दूसरी ओर उपलब्धियों के बखान के लिए हर विभाग जी-जान से जुटा है। टीमें दिनरात काम कर रही हैं। लाखों करोड़ का समारोह भी इसी पाइपलाइन में है। इसके लिए कागजी प्रस्ताव तो जोर-शोर से तैयार किए जा रहे हैं लेकिन मेहमानों को न्योता देना बड़ी चुनौती है। फेस्टिव सीजन के बाद शादी सीजन होगा। इसके बीच धन्नासेठों को एक साथ कहीं बुलाना घर की शादी से ज्यादा कठिन है। चमक-दमक वाले ब्रांडेड नामों के साथ ये समस्या ज्यादा है। बहरहाल प्रोफेशनल्स की टीमें पसीना बहा रही हैं।
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...तो बाकी का नंबर आए
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में इन दिनों अधिकारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया काफी तेज चल रही है। कुछ अधिकारी तो लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। कुछ को अपने से ज्यादा बड़े साहबों के प्रमोशन का इंतजार है क्योंकि जब उनके बढ़ने पर ही कुर्सी खाली होगी और किसी दूसरे को तैनाती मिलेगी। कुछ मामलों में हालत यह है कि पदोन्नति के बाद भी नई तैनाती नहीं हो रही है, क्योंकि अभी जगह खाली ही नहीं है।
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