फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Private hospitals in the capital act arbitrarily regarding ventilators, charging up to ₹50,000 daily; here

यूपी: राजधानी में वेंटिलेटर के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी, रोजाना 50 हजार तक वसूली; जानें पूरा मामला

Wed, 14 Oct 2026 07:03 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, लखनऊ
अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 14 Oct 2026 07:03 PM IST
सार
Register For Event

लखनऊ के निजी अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर के नाम पर प्रतिदिन 40 से 50 हजार रुपये तक वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। मरीजों के परिजनों ने सीएमओ कार्यालय में शिकायतें दर्ज कराई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित शुल्क प्रदर्शित नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करने की बात कही है।

विज्ञापन
UP: Private hospitals in the capital act arbitrarily regarding ventilators, charging up to ₹50,000 daily; here
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Grok AI

विस्तार

निजी अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर के नाम पर मरीजों के परिजनों से मनमानी वसूली के मामले सामने आ रहे हैं। आईजीआरएस पोर्टल और सीएमओ कार्यालय में लिखित शिकायतें पहुंचने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। 

विज्ञापन


शासन की ओर से आईसीयू और वेंटिलेटर के शुल्क की निर्धारित दरें नहीं होने का फायदा अस्पताल उठा रहे हैं। छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों में आईसीयू व वेंटिलेटर का खर्च 40 से 50 हजार रुपये प्रतिदिन तक पहुंच रहा है, जबकि कॉर्पोरेट अस्पतालों में यह रकम और अधिक हो जाती है।
विज्ञापन

 

Trending Videos

केस-1 : गुडंबा स्थित एक निजी अस्पताल में बुजुर्ग महिला के इलाज के नाम पर करीब नौ लाख रुपये वसूलने का आरोप लगा था। महिला वेंटिलेटर पर थी, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। इसके बाद बेटे ने सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि अस्पताल ने परिजनों को बिल नहीं दिया। इससे वसूली की जांच और कार्रवाई में दिक्कत आई। शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से परिजन परेशान हैं।

केस-2 : लोहिया अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने पर परिजन मरीज को गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल ले गए। वहां वेंटिलेटर के नाम पर प्रतिदिन करीब 50 हजार रुपये खर्च करने पड़े। शुल्क चुकाने में असमर्थता जताते हुए परिजन मरीज को दोबारा सरकारी अस्पताल ले आए। इस दौरान तीन दिन में करीब डेढ़ लाख रुपये वसूले गए।



 

विज्ञापन

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू

केंद्र सरकार ने अस्पतालों और क्लीनिकों को अपनी सेवाओं के शुल्क प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 के प्रावधानों के तहत शुल्क की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी है। लखनऊ में वर्ष 2023 में यह व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बावजूद अस्पतालों में सेवाओं और उनके शुल्क का ब्योरा प्रदर्शित नहीं किए जाने की शिकायतें हैं।

 

 

विज्ञापन

कोविड काल में भी हुई थी मनमानी वसूली

कोविड काल में शासन ने निजी अस्पतालों में इलाज के लिए दरें निर्धारित की थीं। इसके बावजूद बेड शुल्क के अलावा डॉक्टरों की फीस, दवाओं और अन्य मदों में वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। कई मामलों में प्रतिदिन का बिल 15 हजार रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये तक पहुंच गया था।

 

कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि  केंद्र सरकार के निर्देशों को निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में सख्ती से लागू कराया जाएगा। जो संस्थान अपनी सेवाओं के शुल्क प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed