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यूपी: गुंडा एक्ट को दमन के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही राज्य सरकार, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Sat, 12 Sep 2026 11:10 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sat, 12 Sep 2026 11:10 PM IST
सार
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कोर्ट ने गोंडा के जिलाधिकारी के 11 मई, 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अली को गुंडा घोषित कर छह महीने के लिए गोंडा से निष्कासित कर दिया गया था। साथ ही मंडलायुक्त के 12 अगस्त, 2026 के अपीलीय आदेश को भी रद्द कर दिया।

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UP: State government using the Goonda Act as a tool of repression.
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 का बार-बार दमन के एक उपकरण के रूप में दुरुपयोग किया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह टिप्पणी गोंडा निवासी जाहिद अली के खिलाफ यूपी गुंडा अधिनियम के तहत दिए गए निष्कासन आदेश को रद्द करने के अपने फैसले के साथ की। मामले में उसे नौ साल पहले ही बरी कर दिया गया था।

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कोर्ट ने गोंडा के जिलाधिकारी के 11 मई, 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अली को गुंडा घोषित कर छह महीने के लिए गोंडा से निष्कासित कर दिया गया था। साथ ही मंडलायुक्त के 12 अगस्त, 2026 के अपीलीय आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें निष्कासन को बरकरार रखा गया था। अली को निष्कासित करने का आदेश दो आपराधिक मामलों में उनकी कथित संलिप्तता पर आधारित था।
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एक मामला 2010 में मारपीट और धमकी देने के आरोप का था। दूसरा 2020 में दंगा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत उल्लंघन से जुड़ा था। लेकिन अली को अगस्त 2017 में गोंडा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 2010 के मामले में पहले ही बरी कर दिया गया था।

अदालत की तल्ख टिप्पणी: कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की कि स्थापित कानून के अनुसार गुंडा अधिनियम एक शक्तिशाली उपकरण है जिसका उपयोग केवल सार्वजनिक अव्यवस्था के स्पष्ट मामलों में ही किया जाना चाहिए। इसके बावजूद अदालत में ऐसे मामलों की भरमार है। पीठ ने कहा कि इस अदालत के समक्ष कई मामले प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि राज्य गुंडा अधिनियम को दमन के उपकरण के रूप में उपयोग करने के दृष्टिकोण पर अडिग है।

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