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यूपी: आखिर क्यों बढ़ रही हैं प्याज की कीमतें? 15 दिन में 20 रुपये प्रति किलो दाम बढ़े
Mon, 24 Aug 2026 09:16 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 24 Aug 2026 09:16 PM IST
सब्जी व्यापारियों का कहना है कि मंडी में दाम बढ़ने से हमें भी महंगा प्याज बेचना पड़ रहा है। वहीं, अगर कोई दो तीन किलो एक साथ खरीदता है तो कीमत कम कर देते हैं।
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प्याज के दाम अचानक बढ़े।
- फोटो : amar ujala
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चीनी की तरह प्याज की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। पखवाड़ा भर पहले करीब 40 रुपये किलो वाला प्याज 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। अलग अलग दुकानों पर प्याज के दामों में 10 रुपये का अंतर दिखा। शहर के पारंपरिक बाजारों में प्याज की कीमत 50-60 रुपये किलो है।
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निशातगंज सब्जी मंडी के व्यापारी आसिफ ने बताया कि प्याज की कीमत 60 रुपये किलो है लेकिन अगर कोई दो-चार किलो लेता है, तो 50 रुपये का भाव लगा देते हैं। बताया कि बारिश की वजह से प्याज सड़ बहुत रहा है। नमी पाकर उसमें फफूंदी लग जा रही है, इसलिए जितना बिक जाए उतना ही अच्छा। बारिश के दौरान स्टॉक को संभालना भी मुश्किल काम है।
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नरही के सब्जी व्यापारी अमितेश ने बताया 15-20 दिन पहले तक 30-40 रुपये में प्याज बिक जा रहा था, इसलिए बहुत स्टॉक नहीं किया गया। अब मंडी में ही प्याज महंगा हो गया है, इसकी वजह से दाम बढ़ाने पड़े। हालांकि, उन्होंने भी बताया कि दो तीन किलो लेने पर 50 का भाव लगा देंगे। हालांकि, अच्छी प्याज की कीमत अभी भी 60 रुपये है।
प्रदेश में नहीं हुई प्याज की फसल, इसलिए नासिक पर निर्भर
कृषि वैज्ञानिक डॉ सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि प्रदेश के फर्रुखाबाद, कन्नौज, मेरठ, एटा और कानपुर में प्याज की खेती सबसे अच्छी होती है। चूंकि, रवि की फसल के लिए अक्तूबर नवंबर में नर्सरी डाल दी जाती थी लेकिन पिछले साल समय से नर्सरी न पड़ने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। क्योंकि खेत खाली नहीं थे। वहीं, खरीफ के सीजन में मई जून में नर्सरी तैयार की जाती है और अगस्त में हर हालत में रोपाई कर दी जाती है, लेकिन इस बार खरीफ सीजन की प्रजातियां कम हैं। दूसरा बारिश की वजह से प्याज बहुत जल्दी गलने लगता है। इसलिए हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में खरीफ सीजन की प्याज की बुआई नहीं हो पाई। इस कारण नासिक की प्याज पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। वहां भी उत्पादन प्रभावित है और बारिश की वजह से महंगाई है।
प्याज का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार ने कोई काम नहीं किया। प्याज की दो फसल होती है। एक बारिश वाली और एक जाड़े वाली। इस बार बारिश वाली प्याज का रकबा कम रहा और वह आ नहीं पाई। इस समय जो प्याज आ रही है वह अप्रैल वाली आ रही है। इस वजह से कमी है। मुख्य रूप से झांसी से कन्नौज तक के आसपास के क्षेत्र में प्याज की खेती होती है।