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नवरात्रि विशेष: रूठी दो बहनों की अनूठी कहानी, एक पाताल में समाई तो दूसरी टेकरी से उतरने लगीं
Mon, 12 Oct 2026 06:01 AM IST
देवास ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: देवास ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 06:01 AM IST
देवास की ऐतिहासिक माता टेकरी मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। लोकमान्यता के अनुसार, दोनों देवियां बहनें हैं, जो विवाद के बाद टेकरी छोड़ने लगी थीं। नवरात्रि में मंदिरों को सजाया गया है और श्रद्धालु दर्शन, पूजा-अर्चना तथा भंडारों में भाग लेकर आस्था व्यक्त कर रहे हैं।
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देवास की टेकरी वाली माताओं की कथा भी निराली है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मालवा की धार्मिक नगरी देवास की पहचान यहां स्थित ऐतिहासिक माता टेकरी से है। टेकरी पर विराजित मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्रि में यहां आस्था का विशेष सैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि दोनों देवियों के वास के कारण ही इस स्थान का नाम देवास पड़ा। माता टेकरी से जुड़ी कई प्राचीन मान्यताएं और किंवदंतियां आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। इनमें दो रूठी हुई बहनों की कहानी विशेष रूप से रोचक है।
लोक मान्यता के अनुसार, माता टेकरी पर विराजित मां तुलजा भवानी को बड़ी माता और मां चामुंडा को छोटी माता कहा जाता है। प्रचलित कथा के मुताबिक, एक बार किसी बात को लेकर दोनों बहनों के बीच विवाद हो गया। नाराज होकर दोनों ने टेकरी छोड़ने का निर्णय कर लिया। बड़ी माता क्रोधित होकर पाताल में समाने लगीं, जबकि छोटी माता टेकरी से नीचे उतरने लगीं। किंवदंती के अनुसार, जब इसकी जानकारी भैरवजी और हनुमानजी को मिली तो वे दोनों देवियों को मनाने पहुंचे। तब तक बड़ी माता का आधा शरीर पाताल में समा चुका था और छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आई थीं। दोनों को मनाने के लिए देवताओं ने विनती की। उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए दोनों देवियां उसी अवस्था में रुक गईं। मान्यता है कि इसी कारण बड़ी माता का आधा स्वरूप पाताल में माना जाता है। यह कथा आज भी माता टेकरी की धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ये भी पढ़ें- मैहर मां शारदा मंदिर: उमड़ा आस्था का सैलाब, नवरात्रि के पहले दिन 1.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
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माता सती के रक्त से जुड़ी मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, माता टेकरी को रक्तपीठ के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। प्रचलित धार्मिक विश्वास के अनुसार, यहां माता सती के हृदय से रक्त की बूंदें गिरी थीं। इसी पवित्र स्थान पर पहाड़ों के बीच से मां चामुंडा प्रकट हुईं, जबकि मां तुलजा भवानी को स्वयंभू माना जाता है।
पवार राजघरानों की कुलदेवियां हैं दोनों माताएं
देवास में कभी पवार राजवंश की सीनियर और जूनियर नाम से दो रियासतें थीं। मान्यता के अनुसार, जूनियर रियासत की कुलदेवी मां तुलजा भवानी और सीनियर रियासत की कुलदेवी मां चामुंडा थीं। यही कारण है कि दोनों मंदिरों का देवास के इतिहास और राजपरिवार की परंपराओं में विशेष स्थान रहा है।
नाथ संप्रदाय की साधना स्थली है टेकरी
देवास की माता टेकरी को नाथ संप्रदाय की साधना स्थली भी माना जाता है। गुरु गोरक्षनाथ, राजा भर्तृहरि और शीलनाथ महाराज जैसे योगियों से इस स्थान की परंपराएं जुड़ी हुई हैं। लोककथाओं में टेकरी से उज्जैन तक करीब 45 किलोमीटर लंबी गुप्त सुरंग होने का भी उल्लेख मिलता है, जिसके जरिए राजा भर्तृहरि के यहां आने की बात कही जाती है। हालांकि, इस सुरंग से जुड़ी मान्यताओं की ऐतिहासिक पुष्टि अलग से आवश्यक है।
ये भी पढ़ें- नवरात्रि पर भक्तिमय हुई राजधानी: शहर में दो हजार से अधिक जगह सजे पंडाल बने आकर्षण, मंदिरों में भक्तों की भीड़
नवरात्रि के लिए सजा माता का दरबार
नवरात्रि को लेकर माता टेकरी के दोनों मंदिरों को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है और गर्मी से राहत देने के लिए कारपेट भी बिछाए गए हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिरों में 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था रहती है। नवरात्रि शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कोई घुटनों के बल तो कोई व्हीलचेयर के सहारे माता के दरबार तक पहुंचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहा है। वहीं, शहर के विभिन्न स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जा रहा है, जहां इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
रोशनी से जगमगाया शहर
नवरात्रि के अवसर पर देवास शहर को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रसूलपुर चौराहे से इंदिरा गांधी चौराहे तक विद्युत सजावट की गई है। कई स्थानों पर भगवा ध्वज लगाए गए हैं। नवरात्रि के दौरान माता टेकरी पर दर्शन, पूजा-अर्चना और सेवा गतिविधियों के चलते पूरे शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।
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लोक मान्यता के अनुसार, माता टेकरी पर विराजित मां तुलजा भवानी को बड़ी माता और मां चामुंडा को छोटी माता कहा जाता है। प्रचलित कथा के मुताबिक, एक बार किसी बात को लेकर दोनों बहनों के बीच विवाद हो गया। नाराज होकर दोनों ने टेकरी छोड़ने का निर्णय कर लिया। बड़ी माता क्रोधित होकर पाताल में समाने लगीं, जबकि छोटी माता टेकरी से नीचे उतरने लगीं। किंवदंती के अनुसार, जब इसकी जानकारी भैरवजी और हनुमानजी को मिली तो वे दोनों देवियों को मनाने पहुंचे। तब तक बड़ी माता का आधा शरीर पाताल में समा चुका था और छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आई थीं। दोनों को मनाने के लिए देवताओं ने विनती की। उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए दोनों देवियां उसी अवस्था में रुक गईं। मान्यता है कि इसी कारण बड़ी माता का आधा स्वरूप पाताल में माना जाता है। यह कथा आज भी माता टेकरी की धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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माता सती के रक्त से जुड़ी मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, माता टेकरी को रक्तपीठ के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। प्रचलित धार्मिक विश्वास के अनुसार, यहां माता सती के हृदय से रक्त की बूंदें गिरी थीं। इसी पवित्र स्थान पर पहाड़ों के बीच से मां चामुंडा प्रकट हुईं, जबकि मां तुलजा भवानी को स्वयंभू माना जाता है।
पवार राजघरानों की कुलदेवियां हैं दोनों माताएं
देवास में कभी पवार राजवंश की सीनियर और जूनियर नाम से दो रियासतें थीं। मान्यता के अनुसार, जूनियर रियासत की कुलदेवी मां तुलजा भवानी और सीनियर रियासत की कुलदेवी मां चामुंडा थीं। यही कारण है कि दोनों मंदिरों का देवास के इतिहास और राजपरिवार की परंपराओं में विशेष स्थान रहा है।
नाथ संप्रदाय की साधना स्थली है टेकरी
देवास की माता टेकरी को नाथ संप्रदाय की साधना स्थली भी माना जाता है। गुरु गोरक्षनाथ, राजा भर्तृहरि और शीलनाथ महाराज जैसे योगियों से इस स्थान की परंपराएं जुड़ी हुई हैं। लोककथाओं में टेकरी से उज्जैन तक करीब 45 किलोमीटर लंबी गुप्त सुरंग होने का भी उल्लेख मिलता है, जिसके जरिए राजा भर्तृहरि के यहां आने की बात कही जाती है। हालांकि, इस सुरंग से जुड़ी मान्यताओं की ऐतिहासिक पुष्टि अलग से आवश्यक है।
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नवरात्रि के लिए सजा माता का दरबार
नवरात्रि को लेकर माता टेकरी के दोनों मंदिरों को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है और गर्मी से राहत देने के लिए कारपेट भी बिछाए गए हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिरों में 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था रहती है। नवरात्रि शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कोई घुटनों के बल तो कोई व्हीलचेयर के सहारे माता के दरबार तक पहुंचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहा है। वहीं, शहर के विभिन्न स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जा रहा है, जहां इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
रोशनी से जगमगाया शहर
नवरात्रि के अवसर पर देवास शहर को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रसूलपुर चौराहे से इंदिरा गांधी चौराहे तक विद्युत सजावट की गई है। कई स्थानों पर भगवा ध्वज लगाए गए हैं। नवरात्रि के दौरान माता टेकरी पर दर्शन, पूजा-अर्चना और सेवा गतिविधियों के चलते पूरे शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।
