इंदौर: इंदौर का ट्रिपल लेयर ब्रिज यातायात के लिए खोला, पहले ही दिन अंधेरे में डूबा
इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर बने प्रदेश के पहले ट्रिपल लेयर ब्रिज को बुधवार शाम पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। इससे प्रतिदिन दो लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही आसान होने और सर्विस रोड पर जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
विस्तार
इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर बना प्रदेश का पहला ट्रिपल लेयर ब्रिज अब पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। इससे सर्विस रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ब्रिज खुलने के पहले ही दिन यहां अंधेरा छाया रहा। ब्रिज की दोनों भुजाओं पर विद्युत पोल लगाए गए हैं, लेकिन बुधवार शाम तक उन पर लाइटें शुरू नहीं हो सकीं।
करीब एक माह पहले ब्रिज की एक भुजा को ट्रैफिक के लिए खोला गया था। अब दोनों तरफ से आवागमन सुचारु हो गया है। आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग के महत्वपूर्ण जंक्शन पर बने इस ब्रिज से प्रतिदिन दो लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से इंदौर की ओर आने वाले वाहनों को भी प्रवेश में सुविधा मिलेगी। बुधवार शाम को ब्रिज को पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया।
अंधेरे में रहा ब्रिज
ब्रिज पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से विद्युत पोल लगाए गए हैं, लेकिन बुधवार को यहां रोशनी की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में वाहनों की हेडलाइट्स के सहारे ही ब्रिज पर आवाजाही होती रही। ब्रिज की दोनों भुजाओं पर बिजली के पोल लगे होने के बावजूद लाइटें चालू नहीं होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर छोटे वाहन चालकों के लिए अंधेरे में आवागमन करना मुश्किल रहा।
तीन राष्ट्रीय राजमार्गों का जंक्शन है एमआर-10
इस जंक्शन पर तीन राष्ट्रीय राजमार्ग मिलते हैं, जो महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों का हिस्सा हैं। इसी वजह से यहां करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से ट्रिपल लेयर ब्रिज का निर्माण किया गया है।
इस परियोजना के तहत दो ब्रिजों के अलावा एक अंडरपास भी बनाया गया है, जो इंदौर-हरदा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है। आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए इस बायपास का निर्माण करीब 26 साल पहले किया गया था। वहीं, एमआर-10 और सुपर कॉरिडोर से होकर यह मार्ग इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है।
इस जंक्शन पर बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए एनएचएआई ने प्रदेश का पहला ट्रिपल लेयर ब्रिज बनाने का फैसला लिया था। हालांकि, इसके निर्माण में चार साल से अधिक का समय लग गया। अब ब्रिज के पूरी तरह शुरू होने से यातायात सुगम होने की उम्मीद है, लेकिन रोशनी की व्यवस्था शुरू नहीं होने से इसकी तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
