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सिंहस्थ 2028: रेलवे स्टेशनों के बाहर अभी से ऐसा जाम, कारोबार प्रभावित, रहवासी भी परेशान
Wed, 16 Sep 2026 06:28 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 16 Sep 2026 06:28 AM IST
इंदौर के सरवटे और नेहरू पार्क रेलवे स्टेशनों के बाहर रोजाना भीषण ट्रैफिक जाम से आम जनता और व्यापारी परेशान हैं। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ में 100 से अधिक ट्रेनों के संचालन से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर में वर्तमान में दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जिनमें से एक सरवटे बस स्टैंड के समीप है और दूसरा नेहरू पार्क के पास। इन दोनों ही स्टेशनों के आसपास की सड़कों पर प्रतिदिन ट्रेनों के आगमन के समय भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। ट्रेनों से उतरते ही यात्रियों की भीड़ बाहर निकलती है और ऑटो, ई-रिक्शा व बसों में सवार होने के लिए सड़कों पर जमावड़ा लग जाता है। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि उस दौरान दोनों स्टेशनों से देशभर के लिए 100 से अधिक ट्रेनों के संचालन की योजना है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शहर के मध्य क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह ठप्प होने की आशंका है।
दुकानों का व्यापार प्रभावित, स्थानीय नागरिक भी परेशान
प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले नागरिकों के साथ आसपास के रहवासी और दुकानदारों ने भी इस हालात पर चिंता जताई है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्तमान में ही जब कोई प्रमुख ट्रेन आती है, तो 20 से 30 मिनट तक दोनों जगह ट्रैफिक जाम लग जाता है। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और हमारा निकलना भी मुश्किल हो जाता है। रहवासियों का कहना है कि वाहन चालक लगातार हार्न बजाते हैं और शोर होता रहता है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण उनका धंधा चौपट होता जा रहा है। ग्राहकों ने इन क्षेत्रों में खरीदारी बंद कर दी है क्योंकि वे अपने वाहनों के साथ यहां से आवाजाही नहीं कर पाते।
ट्रेन आते ही लग जाती है ई-रिक्शा की भीड़
स्थानीय व्यवसायी अमित वर्मा ने बताया कि सरवटे स्टैंड के पास सड़क पहले से ही संकरी है। ट्रेन आते ही ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क के बीच में वाहन खड़े कर देते हैं। जब सिंहस्थ में 100 से अधिक ट्रेनें चलेंगी, तो यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो जाएगा। रहवासी सीमा अलावा कहती हैं कि नेहरू पार्क स्टेशन के पास पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से लोग मुख्य मार्ग पर ही पिक-अप और ड्रॉप करते हैं। प्रशासन को तुरंत नए पिक-अप जोन और डायवर्जन प्लान पर काम करना चाहिए।
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यह विषय संज्ञान में है, वरिष्ठ अधिकारियों से जल्द इस पर चर्चा की जाएगी
अधिकारियों ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान संभावित ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर ट्रैफिक पुलिस और रेलवे प्रशासन समन्वय बनाकर योजना तैयार करेंगे। यदि जरूरत पड़ेगी तो श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार पांडेय ने कहा कि ट्रेनों की आवाजाही के समय ट्रैफिक जाम लगता है, यह बात सही है लेकिन कुछ समय के बाद जाम खुल जाता है। सिंहस्थ के समय लाखों श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही होगी और ट्रेनों की संख्या भी बढ़ेगी। यह विषय हमारी जानकारी में है। अभी सिंहस्थ के लिए लगातार रेलवे विभाग की बैठकें हो रही हैं और कई विषयों पर चर्चा चल रही है। जल्द ही इस विषय को भी संज्ञान में लिया जाएगा। हमारी भी यही प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं के साथ इंदौर के रहवासियों और वाहन चालकों को भी कोई परेशानी न हो। अन्य विभागों के साथ समन्वय करके जल्द इस विषय पर विचार किया जाएगा।
क्या हो सकते हैं समाधान...
ट्रैफिक एक्सपर्ट राजेश मीणा कहते हैं कि सिंहस्थ के दौरान दोनों स्टेशनों के बाहर ट्रैफिक पुलिस का अतिरिक्त बल तैनात किया जाना चाहिए। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए स्टेशन परिसर के भीतर ही ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप पॉइंट निर्धारित किए जाने चाहिए। मुख्य सड़क पर किसी भी वाहन को रुकने की अनुमति नहीं होना चाहिए। सिंहस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए स्टेशनों पर पैसेंजर होल्डिंग एरिया बनाए जा सकते हैं। यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जाए ताकि सड़कों पर एक साथ दबाव न बने।
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दुकानों का व्यापार प्रभावित, स्थानीय नागरिक भी परेशान
प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले नागरिकों के साथ आसपास के रहवासी और दुकानदारों ने भी इस हालात पर चिंता जताई है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्तमान में ही जब कोई प्रमुख ट्रेन आती है, तो 20 से 30 मिनट तक दोनों जगह ट्रैफिक जाम लग जाता है। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और हमारा निकलना भी मुश्किल हो जाता है। रहवासियों का कहना है कि वाहन चालक लगातार हार्न बजाते हैं और शोर होता रहता है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण उनका धंधा चौपट होता जा रहा है। ग्राहकों ने इन क्षेत्रों में खरीदारी बंद कर दी है क्योंकि वे अपने वाहनों के साथ यहां से आवाजाही नहीं कर पाते।
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ट्रेन आते ही लग जाती है ई-रिक्शा की भीड़
स्थानीय व्यवसायी अमित वर्मा ने बताया कि सरवटे स्टैंड के पास सड़क पहले से ही संकरी है। ट्रेन आते ही ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क के बीच में वाहन खड़े कर देते हैं। जब सिंहस्थ में 100 से अधिक ट्रेनें चलेंगी, तो यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो जाएगा। रहवासी सीमा अलावा कहती हैं कि नेहरू पार्क स्टेशन के पास पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से लोग मुख्य मार्ग पर ही पिक-अप और ड्रॉप करते हैं। प्रशासन को तुरंत नए पिक-अप जोन और डायवर्जन प्लान पर काम करना चाहिए।
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यह विषय संज्ञान में है, वरिष्ठ अधिकारियों से जल्द इस पर चर्चा की जाएगी
अधिकारियों ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान संभावित ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर ट्रैफिक पुलिस और रेलवे प्रशासन समन्वय बनाकर योजना तैयार करेंगे। यदि जरूरत पड़ेगी तो श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार पांडेय ने कहा कि ट्रेनों की आवाजाही के समय ट्रैफिक जाम लगता है, यह बात सही है लेकिन कुछ समय के बाद जाम खुल जाता है। सिंहस्थ के समय लाखों श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही होगी और ट्रेनों की संख्या भी बढ़ेगी। यह विषय हमारी जानकारी में है। अभी सिंहस्थ के लिए लगातार रेलवे विभाग की बैठकें हो रही हैं और कई विषयों पर चर्चा चल रही है। जल्द ही इस विषय को भी संज्ञान में लिया जाएगा। हमारी भी यही प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं के साथ इंदौर के रहवासियों और वाहन चालकों को भी कोई परेशानी न हो। अन्य विभागों के साथ समन्वय करके जल्द इस विषय पर विचार किया जाएगा।
क्या हो सकते हैं समाधान...
ट्रैफिक एक्सपर्ट राजेश मीणा कहते हैं कि सिंहस्थ के दौरान दोनों स्टेशनों के बाहर ट्रैफिक पुलिस का अतिरिक्त बल तैनात किया जाना चाहिए। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए स्टेशन परिसर के भीतर ही ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप पॉइंट निर्धारित किए जाने चाहिए। मुख्य सड़क पर किसी भी वाहन को रुकने की अनुमति नहीं होना चाहिए। सिंहस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए स्टेशनों पर पैसेंजर होल्डिंग एरिया बनाए जा सकते हैं। यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जाए ताकि सड़कों पर एक साथ दबाव न बने।
