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ओबीसी आरक्षण: कमलनाथ का सरकार पर हमला, बोले- मदद की पेशकश भी की; भाजपा ने किया पलटवार
Sat, 17 Oct 2026 05:28 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 17 Oct 2026 05:28 PM IST
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर कमजोर कानूनी पैरवी का आरोप लगाया और कांग्रेस की मदद की पेशकश की। भाजपा नेता हितेश वाजपेयी ने पलटवार करते हुए 2019 के अध्यादेश पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों ने आरक्षण मामले में कानूनी तैयारी और जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया।
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पूर्व सीएम कमलनाथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वर्ष 2019 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों से भाजपा सरकार अदालत में इस आरक्षण को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार की कमजोर पैरवी और वकीलों की तैयारी न होने के कारण उच्च न्यायालय से आरक्षण के विरुद्ध निर्णय आया है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा इस व्यवस्था को समाप्त नहीं करना चाहती, तो उसे पूर्ण विधिक तैयारी और आधिकारिक आंकड़ों के साथ उच्चतम न्यायालय जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने से 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा अपने आप समाप्त हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि इस विषय में भाजपा को कांग्रेस से कोई सहायता चाहिए, तो वे मदद के लिए तैयार हैं।
ये भी पढ़ें- ओबीसी रिजर्वेशन: एमपी में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर सियासत तेज, सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर
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भाजपा का पलटवार
कमलनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता हितेश वाजपेयी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा 215 में वर्ष 2019 के अध्यादेश और संशोधन कानून के संदर्भ में स्पष्ट टिप्पणी की गई है। न्यायालय ने तत्कालीन सरकार के फैसलों को पर्याप्त तैयारी के बिना और अनुचित जल्दबाजी में लिया गया माना है।
विधिक तैयारी पर सवाल
भाजपा नेता ने सवाल किया कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर पर्याप्त विधिक तैयारी क्यों नहीं की। उन्होंने ईडब्ल्यूएस वर्ग के 10 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन में हुई देरी पर भी जवाबदेही तय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सांविधानिक स्पष्टता और विधिक तैयारी सर्वोपरि होनी चाहिए।
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कमलनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार की कमजोर पैरवी और वकीलों की तैयारी न होने के कारण उच्च न्यायालय से आरक्षण के विरुद्ध निर्णय आया है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा इस व्यवस्था को समाप्त नहीं करना चाहती, तो उसे पूर्ण विधिक तैयारी और आधिकारिक आंकड़ों के साथ उच्चतम न्यायालय जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने से 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा अपने आप समाप्त हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि इस विषय में भाजपा को कांग्रेस से कोई सहायता चाहिए, तो वे मदद के लिए तैयार हैं।
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भाजपा का पलटवार
कमलनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता हितेश वाजपेयी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा 215 में वर्ष 2019 के अध्यादेश और संशोधन कानून के संदर्भ में स्पष्ट टिप्पणी की गई है। न्यायालय ने तत्कालीन सरकार के फैसलों को पर्याप्त तैयारी के बिना और अनुचित जल्दबाजी में लिया गया माना है।
विधिक तैयारी पर सवाल
भाजपा नेता ने सवाल किया कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर पर्याप्त विधिक तैयारी क्यों नहीं की। उन्होंने ईडब्ल्यूएस वर्ग के 10 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन में हुई देरी पर भी जवाबदेही तय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सांविधानिक स्पष्टता और विधिक तैयारी सर्वोपरि होनी चाहिए।
