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अच्छी खबर: कूनो में भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी चीतों से अधिक, कुल 54 में से 38 भारतीय मूल के
Sun, 11 Oct 2026 05:12 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 11 Oct 2026 05:12 PM IST
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कुल 54 चीतों में से 38 का जन्म भारत में हुआ है, जबकि 16 विदेशी मूल के हैं। पार्क में एक साल से कम उम्र के 28 शावक मौजूद हैं। हाल ही में दो मादा चीतों ने कुल नौ शावकों को जन्म दिया, जिससे चीता पुनर्स्थापना परियोजना को नई उम्मीद मिली है।
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कूनो में चीतों का कुनबा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना परियोजना एक नए और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। पार्क में अब भारत की धरती पर जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक हो गई है। कूनो में मौजूद कुल 54 चीतों में से 38 का जन्म भारत में ही हुआ है। पार्क में कम उम्र के चीतों और शावकों का बड़ा समूह मौजूद है, जिससे देश में चीतों की स्थायी आबादी विकसित होने की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
भारत में जन्मे चीतों का बढ़ता कुनबा
कूनो नेशनल पार्क में मौजूद कुल 54 चीतों में से 38 भारतीय मूल के हैं, जबकि 16 चीतों को विदेश से लाया गया था। विदेशी मूल के इन 16 चीतों में नामीबिया से तीन, दक्षिण अफ्रीका से सात और बोत्सवाना से छह चीते शामिल हैं। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि संख्या बढ़ने के साथ ही चीतों का स्वस्थ रहना और प्राकृतिक वातावरण में खुद को ढालना बेहद जरूरी है। भविष्य में चीतों के सफल प्रजनन से नई पीढ़ी तैयार होगी, जो इस परियोजना की सफलता का मुख्य आधार बनेगी।
ये भी पढ़ें- एमपी: कूनो-गांधीसागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बना चीतों का तीसरा घर, सीएम यादव ने छोड़े दो चीते
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कूनो में शावकों का सबसे बड़ा समूह
उम्र के आधार पर वर्गीकरण करें तो कूनो नेशनल पार्क में एक साल से कम उम्र के 28 शावक मौजूद हैं, जो यहां का सबसे बड़ा समूह है। इसके अतिरिक्त, एक से ढाई वर्ष की उम्र के 10 चीते और तीन से छह वर्ष की उम्र वाले 16 वयस्क चीते पार्क में रह रहे हैं। सामान्यतः ढाई वर्ष की उम्र पार करने के बाद चीते को वयस्क माना जाता है। कम उम्र के इन चीतों के स्वास्थ्य, विकास और प्राकृतिक परिस्थितियों में ढलने की क्षमता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इनकी प्रजनन क्षमता बेहतर बनी रहे।
हाल ही में हुआ नए शावकों का जन्म
कूनो में हाल के महीनों में कई नए शावकों का आगमन हुआ है, जिससे चीतों का परिवार लगातार बढ़ रहा है। बीते 5 अक्तूबर को मादा चीता केजेपी-21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इससे पहले 18 सितंबर को मादा चीता केजेपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया था। इनके अलावा इसी वर्ष जन्मे अन्य शावक भी पार्क की आबादी में शामिल हैं। इन नए सदस्यों के आने से भारत में जन्मे चीतों का कुनबा और समृद्ध हुआ है।
भविष्य के लिए बेहतर संभावनाएं
चीता पुनर्स्थापना परियोजना का आगामी चरण इस आबादी को लंबी अवधि तक सुरक्षित और सेहतमंद बनाए रखने पर केंद्रित है। यदि चीतों को अनुकूल माहौल मिलता रहा और प्रजनन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही, तो कूनो आने वाले समय में देश में चीतों की स्थायी और आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करने का मुख्य केंद्र बन सकता है।
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भारत में जन्मे चीतों का बढ़ता कुनबा
कूनो नेशनल पार्क में मौजूद कुल 54 चीतों में से 38 भारतीय मूल के हैं, जबकि 16 चीतों को विदेश से लाया गया था। विदेशी मूल के इन 16 चीतों में नामीबिया से तीन, दक्षिण अफ्रीका से सात और बोत्सवाना से छह चीते शामिल हैं। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि संख्या बढ़ने के साथ ही चीतों का स्वस्थ रहना और प्राकृतिक वातावरण में खुद को ढालना बेहद जरूरी है। भविष्य में चीतों के सफल प्रजनन से नई पीढ़ी तैयार होगी, जो इस परियोजना की सफलता का मुख्य आधार बनेगी।
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कूनो में शावकों का सबसे बड़ा समूह
उम्र के आधार पर वर्गीकरण करें तो कूनो नेशनल पार्क में एक साल से कम उम्र के 28 शावक मौजूद हैं, जो यहां का सबसे बड़ा समूह है। इसके अतिरिक्त, एक से ढाई वर्ष की उम्र के 10 चीते और तीन से छह वर्ष की उम्र वाले 16 वयस्क चीते पार्क में रह रहे हैं। सामान्यतः ढाई वर्ष की उम्र पार करने के बाद चीते को वयस्क माना जाता है। कम उम्र के इन चीतों के स्वास्थ्य, विकास और प्राकृतिक परिस्थितियों में ढलने की क्षमता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इनकी प्रजनन क्षमता बेहतर बनी रहे।
हाल ही में हुआ नए शावकों का जन्म
कूनो में हाल के महीनों में कई नए शावकों का आगमन हुआ है, जिससे चीतों का परिवार लगातार बढ़ रहा है। बीते 5 अक्तूबर को मादा चीता केजेपी-21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इससे पहले 18 सितंबर को मादा चीता केजेपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया था। इनके अलावा इसी वर्ष जन्मे अन्य शावक भी पार्क की आबादी में शामिल हैं। इन नए सदस्यों के आने से भारत में जन्मे चीतों का कुनबा और समृद्ध हुआ है।
भविष्य के लिए बेहतर संभावनाएं
चीता पुनर्स्थापना परियोजना का आगामी चरण इस आबादी को लंबी अवधि तक सुरक्षित और सेहतमंद बनाए रखने पर केंद्रित है। यदि चीतों को अनुकूल माहौल मिलता रहा और प्रजनन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही, तो कूनो आने वाले समय में देश में चीतों की स्थायी और आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करने का मुख्य केंद्र बन सकता है।
