इस साल 16 जुलाई यानी आज गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जा रहा है। गुरु पूजन के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल की इस पूर्णिमा की रात चंद्रग्रहण भी होगा। चंद्रग्रहण 16 की रात 1:32 बजे से शुरू होकर 4:30 बजे तक होगा।
जिसका मोक्ष तड़के साढ़े चार बजे तक होगा। ग्रहण की अवधि दो घंटे 58 मिनट रहेगी। ग्रहण का सूतक 16 जुलाई की अपराह्न 4:26 बजे से लगेगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा पर आप शाम 4:26 बजे से पहले ही पूजा करेंगे तो आपको पूजा का फल मिलेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि ग्रहण भारत समेत विभिन्न देशों में दिखाई देगा। गुरु पूर्णिमा पूजन सूतक काल से पहले किया जाना लाभकारी रहेगा। चंद्रग्रहण भारत समेत एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका में भी दिखाई देगा।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि ग्रहणकाल में प्रकृति के भीतर कई तरह की नकारात्मक और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। लिहाजा, इस दौरान कई ऐसे काम हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक समय को आमतौर पर अशुभ मुहूर्त समय माना जाता है। इस काल में कोई भी अच्छा कार्य नहीं किया जाता।
पुराणों के अनुसार भगवान शिव सबसे पहले गुरु माने जाते हैं। शनि और परशुराम इनके दो शिष्य हैं। भोले बाबा ने ही सबसे पहले धरती पर सभ्यता और धर्म का प्रचार प्रसार किया था। शिव को आदिनाथ भी कहा जाता है। आदिगुरु शिव ने शनि और परशुराम के अलावा सात अन्य लोगों को भी ज्ञान दिया। ये ही आगे चलकर सप्तर्षि कहलाए।