किडनी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण अंग है। शरीर में खून को साफ रखने की बड़ी जिम्मेदारी इसी अंग के पास होती है। इतना ही नहीं किडनी लगातार काम करते हुए शरीर से बेकार पदार्थ बाहर निकालने, पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और कई जरूरी रासायनिक संतुलनों को बनाए रखने में भी मदद करती है। मतलब शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने में इस छोटे से अंग की बड़ी मेहनत होती है।
हेल्थ टेस्ट: किडनी ठीक से काम कर रही है या नहीं? केएफटी टेस्ट से लग सकता है पता, जानिए कब कराएं
केएफटी यानी किडनी फंक्शन टेस्ट, किडनी की फिल्टर करने की क्षमता और संभावित नुकसान का पता लगाने में मदद करती है। डायबिटीज, हाई बीपी, हृदय रोग और किडनी रोग की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों के लिए नियमित जांच खास तौर पर जरूरी है।
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किडनी की सेहत की जांच
किडनी फंक्शन टेस्ट यानी केएफटी में खून और कभी-कभी पेशाब की जांच भी की जाती है। इसमें क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया और ईजीएफआर जैसे टेस्ट किए जाते हैं। किडनी की बीमारी की जांच में यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो यानी यूएसीआर भी महत्वपूर्ण है, यह किडनी से प्रोटीन के लीक होने का संकेत देता है।
- डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो सभी लोगों को बार-बार केएफटी कराने की जरूरत नहीं होती।
- हालांकि जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या परिवार में किडनी फेलियर की हिस्ट्री रही है उनके लिए ये जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
- डायबिटीज वाले मरीजों को साल में 1-2 बार किडनी की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
केएफटी टेस्ट के बारे में जानिए
किडनी फंक्शन टेस्ट आम तौर पर किडनी की कार्यक्षमता जानने के लिए किए जाने वाला टेस्ट है। इसमें खून की जांच से सीरम क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया नाइट्रोजन जैसे पैरामीटर देखे जाते हैं।
- क्रिएटिनिन शरीर की मांसपेशियों से बनने वाला अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे सामान्य स्थिति में किडनी खून से बाहर निकालती है। किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने पर रक्त में क्रिएटिनिन बढ़ सकता है।
- क्रिएटिनिन से ईजीएफआर यानी ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट निकाला जाता है। यह किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान देता है।
केएफटी से किडनी के बारे में क्या पता चलता है?
केएफटी टेस्ट की मदद से यह देखने में मदद मिलती है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है? इसके लिए ईजीएफआर महत्वपूर्ण पैरामीटर है। ईजीएफआर 60 से कम होना किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है।
- इसके अलावा इस टेस्ट से यूरिया एल्ब्यूमिन (यूएसीआर) का भी पता चलता है।
- स्वस्थ किडनी आमतौर पर एल्ब्यूमिन को पेशाब में जाने से रोकती है। पेशाब में ज्यादा एल्ब्यूमिन आना किडनी की समस्याओं का संकेत हो सकता है।
- यूएसीआर 30 mg/g से अधिक होने पर किडनी की बीमारी की ओर इशारा हो सकता है।
- हालांकि स्थिति के सही आकलन के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार दूसरे जांच भी करा सकते हैं।
किन लोगों के लिए केएफटी टेस्ट की ज्यादा जरूरत
डॉक्टर कहते हैं स्वस्थ लोगों को 1-2 साल में ये टेस्ट कराना चाहिए। वहीं जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कि़डनी रोगों की फैमिली हिस्ट्री रही है उन लोगों को हर 6 महीने में ये जांच कराने की सलाह दी जाती है।
- बढ़े हुए शुगर और ब्लड प्रेशर का किडनी की सेहत पर नकारात्मक असर होता है, ऐसे में इन मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टरी सलाह लेते रहना चाहिए।
- केएफटी के साथ कुछ मरीजों को यूरिन टेस्ट भी कराने की सलाह दी जा सकती है ताकि किडनी की स्थिति का सही से पता लगाया जा सके।
- नियमित जांच की मदद से बीमारी को समय रहते पकड़ने और इलाज करके ठीक करने की संभावना बढ़ जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।