Couple Fight: हर रिश्ते में मतभेद और छोटी-बड़ी लड़ाइयां होना असामान्य नहीं है। दो अलग व्यक्तित्व, अलग सोच, अलग आदतें और अलग भावनात्मक जरूरतें जब एक रिश्ते में साथ आती हैं, तो कभी-कभी टकराव होना स्वाभाविक है। लेकिन मुश्किल तब शुरू होती है, जब कपल अपनी हर लड़ाई और निजी बात किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करने लगते हैं। गुस्से और दुख के समय हमें अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत महसूस होती है, जो हमारी बात सुने और हमें सही रास्ता दिखाए। ऐसे में तीसरे व्यक्ति की सलाह कभी रिश्ते को टूटने से बचाने में मदद कर सकती है, तो कभी वही सलाह गलतफहमी और दूरी को और बढ़ा सकती है।
दरअसल, हर व्यक्ति अपने अनुभव, सोच और रिश्तों को अपने नजरिए से देखता है। इसलिए किसी दोस्त या रिश्तेदार की सलाह आपके रिश्ते के लिए हमेशा सही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार बाहरी व्यक्ति पूरी कहानी जाने बिना राय बना लेता है और उसकी सलाह केवल एक पक्ष को सही ठहराने लगती है। वहीं, कुछ गंभीर परिस्थितियों में एक निष्पक्ष और समझदार व्यक्ति की मदद Couple को बातचीत का सही तरीका और समाधान खोजने में मदद कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि यह समझा जाए कि रिश्ते की लड़ाई में तीसरे व्यक्ति की सलाह कब मददगार है और कब नुकसानदायक साबित हो सकती है।
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जब दोनों लोग एक ही बात पर बार-बार लड़ रहे हों
अगर किसी कपल के बीच एक ही मुद्दे को लेकर बार-बार विवाद हो रहा है और दोनों बातचीत के बावजूद समाधान तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो किसी निष्पक्ष व्यक्ति की मदद उपयोगी हो सकती है। ऐसा व्यक्ति दोनों की बात सुनकर समस्या को अलग नजरिए से समझने में मदद कर सकता है। हालांकि सलाह देने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए, जो किसी एक पक्ष का पक्ष लेने के बजाय स्थिति को संतुलित तरीके से देख सके।
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जब भावनाओं में आकर फैसला लेना मुश्किल हो
लड़ाई के दौरान गुस्सा, दुख और निराशा अक्सर सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे समय में किसी भरोसेमंद और समझदार व्यक्ति से बात करना भावनाओं को संभालने में मदद कर सकता है। लेकिन यहां सलाह लेने और निर्णय किसी दूसरे के हाथ में सौंप देने में फर्क है। अंतिम फैसला हमेशा उस व्यक्ति को लेना चाहिए, जिसका रिश्ता और जीवन उस निर्णय से प्रभावित होने वाला है।
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जब गंभीर समस्या हो तो मदद लेना जरूरी हो सकता है
अगर रिश्ते में लगातार डर, धमकी, नियंत्रण, हिंसा या किसी तरह का गंभीर व्यवहार मौजूद है, तो केवल दोस्तों की सलाह पर निर्भर रहने के बजाय भरोसेमंद परिवार, संबंधित सहायता सेवाओं या प्रशिक्षित विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में समस्या को छिपाकर रखना या यह सोचकर सहन करना कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, सही विकल्प नहीं होता।
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दोस्त या परिवार की सलाह कब नुकसान कर सकती है?
हर रिश्ते की पूरी सच्चाई केवल उस कपल को पता होती है, जो उस रिश्ते को जी रहा होता है। जब कोई व्यक्ति सिर्फ अपनी तरफ की कहानी बताता है, तो सलाह देने वाला स्वाभाविक रूप से उसी के नजरिए से प्रभावित हो सकता है। इसके बाद वह पार्टनर के प्रति नकारात्मक राय बना सकता है। बाद में कपल के बीच सुलह हो भी जाए, लेकिन तीसरे व्यक्ति के मन में बनी नकारात्मक छवि लंबे समय तक रह सकती है।