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राम मंदिर चंदा चोरी: ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच बढ़ी दूरियां, बदले समीकरण; चंपत के 'लेटर बम' ने बढ़ाई तपिश
राम मंदिर ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद समीकरण बदल गए हैं। ट्रस्ट की दो बैठकों से नृपेंद्र मिश्र दूर रहे हैं। समिति की बैठकों से ट्रस्ट की दूरी है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच सब कुछ सामान्य है तो दोनों पक्षों की लगातार बैठकों में एक-दूसरे का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिख रहा?
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण समिति के बीच तल्खी अब सिर्फ चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गई है। ट्रस्ट और समिति के बीच बढ़ती दूरी का असर अब औपचारिक बैठकों में साफ दिखाई देने लगा है।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की हुई दो बैठकों से निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की गैरमौजूदगी और दूसरी ओर निर्माण समिति की जुलाई तथा 19 से 21 अगस्त तक हुई बैठकों से ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी की दूरी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले जहां निर्माण समिति की बैठकों में ट्रस्ट की ओर से पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव की मौजूदगी नियमित मानी जाती थी, वहीं अब यह प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब है। चंपत राय और अनिल मिश्र के पद से हटने के बाद ट्रस्ट की ओर से निर्माण समिति की बैठकों में किसी पदाधिकारी की मौजूदगी न होना घटनाक्रम को और गंभीर बना रहा है।
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राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र।
- फोटो : amar ujala
चढ़ावा चोरी पर मुखर हुए नृपेंद्र, फिर अचानक खामोशी
छह जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने सार्वजनिक तौर पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी थी। 18 जून से दिल्ली में विभिन्न टेलीविजन चैनलों को दिए साक्षात्कारों में उन्होंने घटना को चोरी के बजाय डकैती तक बताया। हालांकि शुरुआत में उनका स्पष्ट रुख था कि उनका दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित है, लेकिन चढ़ावे और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर भी उनकी मुखर प्रतिक्रिया सामने आई।
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नृपेंद्र मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
23 जून के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से दूरी बना ली। छह जुलाई को ट्रस्ट की पहली बैठक हुई। पूर्व की बैठकों में नियमित रूप से शामिल रहने वाले नृपेंद्र मिश्र इस बैठक में नहीं पहुंचे। इसके बाद जुलाई में हुई निर्माण समिति की बैठक में ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं रहा। 19 से 21 अगस्त तक चली अगली बैठक में भी यही तस्वीर बनी रही।
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चंपत राय।
- फोटो : अमर उजाला
कभी साथ बैठकर तय होते थे फैसले
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि करीब छह महीने पहले से ही नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से खुद को अलग करना शुरू कर दिया था। उनका फोकस केवल निर्माण कार्यों तक सीमित होता गया। सूत्रों के अनुसार, पहले निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़े छोटे-बड़े मुद्दों पर बैठकों में विस्तार से चर्चा होती थी।
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