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ओंकारेश्वर झूला पुल: आखिर क्यों टूट रहे पुल की रॉड-सस्पेंशन हुक? कितने दिन में होगी मरम्मत और कब होगा पुल शुरू
Thu, 25 Jun 2026 08:32 PM IST
Dinesh Sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Thu, 25 Jun 2026 08:32 PM IST
ओंकारेश्वर-ममलेश्वर को जोड़ने वाले झूला पुल की मरम्मत दूसरे दिन भी बारिश के कारण प्रभावित रही। बुधवार को सस्पेंशन हुक टूटने के बाद पुल बंद कर दिया गया था। एनएचडीसी ने नया हुक लगाकर मरम्मत लगभग पूरी कर ली है। पर सवाल है कि आखिर क्यों बार-बार पुल बंद करने की नौबत आ रही है। अब पुल कब से शुरू होगा.. पढ़िए इस रिपोर्ट में-
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ओंकारेश्वर झूला पुल का टूटा सस्पेंशन हुक बदला गया।
- फोटो : अमर उजाला
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ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग को जोड़ने वाले झूला पुल के सस्पेंशन हुक की मरम्मत का आज दूसरा दिन था। प्रशासन का दावा था कि पुल एक दिन में शुरू करवा दिया जाएगा, लेकिन इलाके में भारी बरसात के बाद काम करने में काफी परेशानी आ रही है। पूरे दिन काम प्रभावित रहा। उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहने पर शुक्रवार से पुल को श्रद्धालुओं और आमजन के लिए पुनः खोल दिया जाएगा।
ओंकारेश्वर झूला पुल की मरम्मत जारी
- फोटो : अमर उजाला
कैसे हो रही मरम्मत
एनएचडीसी ने क्षतिग्रस्त हुक के स्थान पर नया हुक लगाया है तथा पुल पर लगे अन्य सभी हुक और सस्पेंशन प्रणाली की भी चरणबद्ध जांच की जाएगी। इंदौर के जीएसआईटीएस विशेषज्ञ इंजीनियरों एवं तकनीकी संस्थान की टीम भी पुल का निरीक्षण करेगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के दौरान पुल पर किए गए विभिन्न प्रयोग, जैसे टीन शेड लगाना और बाद में हटाना, अतिरिक्त भार तथा लगातार होने वाले बदलाव भी संरचना पर प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में नियमित तकनीकी परीक्षण और निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही आवागमन अत्यंत आवश्यक है।
एनएचडीसी ने क्षतिग्रस्त हुक के स्थान पर नया हुक लगाया है तथा पुल पर लगे अन्य सभी हुक और सस्पेंशन प्रणाली की भी चरणबद्ध जांच की जाएगी। इंदौर के जीएसआईटीएस विशेषज्ञ इंजीनियरों एवं तकनीकी संस्थान की टीम भी पुल का निरीक्षण करेगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के दौरान पुल पर किए गए विभिन्न प्रयोग, जैसे टीन शेड लगाना और बाद में हटाना, अतिरिक्त भार तथा लगातार होने वाले बदलाव भी संरचना पर प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में नियमित तकनीकी परीक्षण और निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही आवागमन अत्यंत आवश्यक है।
ओंकारेश्वर बांध परियोजना एनएचडीसी के प्रमुख धीरेंद्र द्विवेदी के निर्देशन में इंजीनियर पुल का सुधार करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
कितना भार सह सकता है झूला पुल
मरम्मत करने वाले इंजीनियरों-अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुल पर एक समय में अधिकतम 500 लोगों का भार ही सुरक्षित माना गया है। इसके बावजूद भीड़, सेल्फी लेने के लिए रुकना और क्षमता से अधिक लोगों का एक साथ पुल पर पहुंचना लगातार सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है।
मरम्मत करने वाले इंजीनियरों-अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुल पर एक समय में अधिकतम 500 लोगों का भार ही सुरक्षित माना गया है। इसके बावजूद भीड़, सेल्फी लेने के लिए रुकना और क्षमता से अधिक लोगों का एक साथ पुल पर पहुंचना लगातार सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है।
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ओंकारेश्वर के झूला पुल पर भीड़ का भार खतरनाक बताया गया है। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले कब बंद हुआ था झूला पुल
झूला पुल क्षतिग्रस्त होने की घटना इससे पहले 2023 में भी हुई थी। उस समय पुल का सस्पेंशन हुक क्षतिग्रस्त हुआ है। वर्ष 2023 में भी हुक सीधा हो गया था, हालांकि उस समय पुल का भार फाउंडेशन पर स्थानांतरित हो जाने से बड़ा हादसा टल गया था। 2023 में इंदौर संभाग के तत्कालीन आयुक्त पवन शर्मा, आईजी खंडवा कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पूल की संपूर्ण जाच की थी। व्यापक तकनीकी जांच, मरम्मत और विशेषज्ञों की लिखित अनुमति के बाद ही पुल को चार माह पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।
ओंकारेश्वर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अंतर सिंह बारे, भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि 2023 में भी स्कूल की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। उस समय महाशिवरात्रि पर्व पर्व पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सीहोर में कथा से पहले प्रातः 4:00 बजे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पुल पर इतनी भीड़ हो गई थी। उसी समय यह टेंशन राड टूटी थी। आसपास दुकानदार सहित मैंने पुल के पास बस लगाकर लोगों को निकाला था। मात्र तीन साल ही तो हुए हैं, पुल की मरम्मत किए हुए। इस प्रकार की घटनाएं कभी-भी बड़ा रूप ले सकती है।
झूला पुल क्षतिग्रस्त होने की घटना इससे पहले 2023 में भी हुई थी। उस समय पुल का सस्पेंशन हुक क्षतिग्रस्त हुआ है। वर्ष 2023 में भी हुक सीधा हो गया था, हालांकि उस समय पुल का भार फाउंडेशन पर स्थानांतरित हो जाने से बड़ा हादसा टल गया था। 2023 में इंदौर संभाग के तत्कालीन आयुक्त पवन शर्मा, आईजी खंडवा कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पूल की संपूर्ण जाच की थी। व्यापक तकनीकी जांच, मरम्मत और विशेषज्ञों की लिखित अनुमति के बाद ही पुल को चार माह पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।
ओंकारेश्वर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अंतर सिंह बारे, भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि 2023 में भी स्कूल की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। उस समय महाशिवरात्रि पर्व पर्व पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सीहोर में कथा से पहले प्रातः 4:00 बजे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पुल पर इतनी भीड़ हो गई थी। उसी समय यह टेंशन राड टूटी थी। आसपास दुकानदार सहित मैंने पुल के पास बस लगाकर लोगों को निकाला था। मात्र तीन साल ही तो हुए हैं, पुल की मरम्मत किए हुए। इस प्रकार की घटनाएं कभी-भी बड़ा रूप ले सकती है।
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ओंकारेश्वर बांध परियोजना एनएचडीसी के प्रमुख धीरेंद्र द्विवेदी के निर्देशन में इंजीनियर पुल का सुधार करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
मरम्मत कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मौसम अनुकूल रहने पर शुक्रवार से पुल खोलने का प्रयास किया जाएगा। पुल के सभी सस्पेंशन हुक और तकनीकी पहलुओं की विशेषज्ञों से जांच कराई जाएगी। सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए क्षमता से अधिक भार किसी भी स्थिति में नहीं दिया जाएगा।
-धीरेंद्र कुमार द्विवेदी, परियोजना प्रमुख, एनएचडीसी, ओंकारेश्वर
