पंजाब में चाचा-भतीजा नायाब तरीके से अवैध शराब की तस्करी कर रहे थे। दाेनों ने अपने घर में बैडरूम व बाथरूम के नीचे पेट्राेल की तर्ज पर अवैध शराब तस्करी के लिए 1000 लीटर वाला स्टोरेज टैंक लगा रखा था। बिक्री के लिए दोनों टुल्लू पंप की मदद से शराब की बोतलें भरते और बेच देते। दोनों ने पुलिस व आबकारी विभाग से बचने के लिए फर्श के नीचे स्टोरेज टैंक बनाया था और बाकायदा पाइपलाइन भी बिछा रखी थी।
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जमीन के नीचे दबाई थी प्लास्टिक की टंकी
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18 घंटे चली रेड
छापेमारी करने आई आबकारी व पुलिस विभाग की टीम भी यह देखकर हैरान रह गए। जिला कपूरथला के समीपवर्ती गांव नवां पिंड भट्ठे में संयुक्त टीम ने इस अवैध शराब फैक्टरी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। अवैध शराब तस्करी के लिए बदनाम इस गांव में 18 घंटे तक चली संयुक्त छापेमारी के दौरान अवैध शराब निर्माण इकाई का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, भतीजा फरार है।
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18 घंटे चली रेड
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291.25 लीटर शराब बरामद
आरोपियों की पहचान भतीजा सुखजीत सिंह उर्फ जीती और चाचा अजीत सिंह निवासी गांव नवां पिंड भट्ठे के तौर पर हुई। छापेमारी के दौरान टीम ने 2,91,250 मिलीलीटर (291.25 लीटर) अवैध शराब बरामद की। इसके अलावा जमीन के नीचे बने गुप्त ठिकाने से शराब बनाने की पूरी व्यवस्था का खुलासा हुआ। कार्रवाई 28 जुलाई सुबह छह बजे शुरू होकर रात 12:30 बजे तक चली।
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बरामद अवैध शराब
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जमीन से निकली 1 हजार लीटर की टंकी
इस दौरान बेडरूम और बाथरूम के फर्श के नीचे करीब 1,000 लीटर क्षमता का भूमिगत स्टोरेज टैंक मिला। अधिकारियों ने पाइपलाइन सिस्टम, वाटर पंप और अवैध शराब निर्माण व सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी जब्त किए। जिला आबकारी अधिकारी सुखजीत सिंह चाहल ने बताया कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई उप आबकारी एवं कर आयुक्त (आबकारी) जालंधर जोन रणजीत सिंह तथा सहायक आबकारी एवं कर आयुक्त (आबकारी) कपूरथला रेंज नवजीत सिंह के निर्देश पर की गई।
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जमीन से निकाली शराब की टंकी
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लंबे समय से कर रहे थे तस्करी
आबकारी विभाग और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने पुख्ता सूचना के आधार पर लंबे समय से सक्रिय एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी काफी समय से अवैध शराब का निर्माण और आपूर्ति कर रहे थे। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा था। वहीं, नकली शराब के उत्पादन और वितरण से लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा था।