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भारतीय रेलवे: स्लीपर और एसी कोच की इमरजेंसी विंडो में क्या होता है अंतर? जानें सुरक्षा के नियम

Wed, 16 Sep 2026 03:56 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Wed, 16 Sep 2026 03:56 PM IST
सार
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How To Open Train Emergency Window: कई बार ऐसा होता है कि ट्रेन की एसी बोगी की इमरजेंसी विडों के बारे में लोगों को नहीं मालूम होता है। असल में स्लिपर और जनरल बोगी में आपातकालिन खिड़की दिखती है लेकिन एसी कोच में उतने स्पष्ट तरीके से इमरजेंसी विंडो नहीं दिखती है। आइए इस लेख में ट्रेन के इमरजेंसी विंडो से जुड़े कुछ जरूरी बातें समझते हैं।

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Difference Between Sleeper and AC Coach Emergency Window in Indian Railways in hindi
ट्रेन इमरजेंसी विंडो अंतर - फोटो : AI

Indian Railways Emergency Exit Rules: भारतीय रेलवे में सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर कोच में 'इमरजेंसी विंडो' यानी आपातकालीन खिड़की बनाई जाती है। ट्रेन में किसी भी तरह के हादसे, आगजनी या आपात स्थिति के समय यात्री इस खिड़की के जरिए बोगी से सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं।



मगर अक्सर यात्रियों को यह पता नहीं होता कि स्लीपर और एसी कोच की इमरजेंसी खिड़कियों की बनावट, उन्हें खोलने के तरीके और सुरक्षा के नियमों में काफी बड़ा अंतर होता है। इस अंतर को समझना बेहद जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर आप सही समय पर सही कदम उठा सकें। आइए इस लेख आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों खिड़कियों के मुख्य अंतर क्या है।

Difference Between Sleeper and AC Coach Emergency Window in Indian Railways in hindi
कांच और ग्रिल की बनावट में मुख्य अंतर - फोटो : Adobe Stock

कांच और ग्रिल की बनावट में मुख्य अंतर

  • स्लीपर कोच की इमरजेंसी विंडो में लोहे की लाल रंग की सेफ्टी ग्रिल लगी होती है, जिसे लीवर हटाकर आसानी से खोला जा सकता है।
  • इसके विपरीत, एसी कोच पूरी तरह सीलबंद और वातानुकूलित होते हैं, इसलिए इनकी इमरजेंसी खिड़की में डबल-लेयर वाला मोटा सेफ्टी ग्लास (शीशा) लगा होता है, जिसे खोलने के बजाय खास हथौड़े से तोड़ना पड़ता है।
Difference Between Sleeper and AC Coach Emergency Window in Indian Railways in hindi
ट्रेन इमरजेंसी विंडो अंतर - फोटो : AI

इमरजेंसी विंडो खोलने और तोड़ने का सही तरीका

  • स्लीपर कोच में खिड़की के पास बने लाल लीवर को ऊपर की तरफ खींचते ही लोहे की ग्रिल बाहर की ओर खुल जाती है।
  • वहीं एसी कोच में खिड़की के पास ही एक छोटा लाल रंग का इमरजेंसी हैमर (हथौड़ा) टंगा होता है।
  • आपात स्थिति में इस हैमर से शीशे के चारों कोनों पर तेज प्रहार करके कांच को तोड़कर बाहर निकला जाता है।
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हर कोच में इमरजेंसी विंडो की संख्या और पहचान - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

हर कोच में इमरजेंसी विंडो की संख्या और पहचान

  • भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, प्रत्येक स्लीपर और एसी कोच में कुल 4 इमरजेंसी विंडो होती हैं।
  • ये खिड़कियां बोगी के दोनों तरफ मध्य (मिडिल) हिस्से में स्थित होती हैं।
  • इनकी पहचान आसानी से हो सके, इसके लिए खिड़की के ठीक ऊपर लाल रंग के पेंट से 'इमरजेंसी विंडो' लिखा होता है और उसके पास इस्तेमाल का तरीका दर्ज रहता है।
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बिना वजह इमरजेंसी विंडो खोलने पर कानूनी सजा और जुर्माना - फोटो : AI Generated

बिना वजह इमरजेंसी विंडो खोलने पर कानूनी सजा और जुर्माना

  • रेलवे सुरक्षा अधिनियम के तहत बिना किसी ठोस आपातकालीन कारण के इमरजेंसी विंडो की ग्रिल खोलना, शीशा तोड़ना या हथौड़ा चुराना दंडनीय अपराध है।
  • ऐसा करते पकड़े जाने पर रेलवे पुलिस द्वारा भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और दोषी पाए जाने पर जेल की सजा भी हो सकती है।
  • इसलिए इसका इस्तेमाल केवल वास्तविक इमरजेंसी में ही करें।
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