Joint Bank Account ATM Rules: जब दो या दो से अधिक लोग मिलकर बैंक में एक साझा खाता खुलवाते हैं, तो उसे ज्वाइंट बैंक अकाउंट कहा जाता है। अक्सर पति-पत्नी, माता-पिता या व्यावसायिक साझेदार मिलकर ऐसा खाता खुलवाते हैं ताकि पैसों का लेनदेन आसान हो सके। हालांकि, ज्वाइंट अकाउंट खुलवाते समय कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि एटीएम या डेबिट कार्ड किसे मिलेगा।
बैंक के नियमों के अनुसार, एटीएम कार्ड की पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने खाते को किस मोड में खुलवाया है। सही मोड का चुनाव करके दोनों खाताधारक अलग-अलग एटीएम कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ज्वाइंट अकाउंट में एटीएम कार्ड से जुड़े नियम क्या हैं।
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'आइदर और सर्वाइवर' मोड के नियम
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'आइदर और सर्वाइवर' मोड के नियम
- अगर ज्वाइंट अकाउंट 'आइदर और सर्वाइवर' मोड में खोला गया है, तो दोनों खाताधारकों को अलग-अलग एटीएम कार्ड मिल सकते हैं।
- इस मोड में दोनों खाताधारक स्वतंत्र रूप से लेनदेन कर सकते हैं और दोनों के नाम से अलग-अलग डेबिट कार्ड जारी किए जाते हैं।
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'जॉइंटली' ऑपरेटेड खाते में एटीएम कार्ड
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'जॉइंटली' ऑपरेटेड खाते में एटीएम कार्ड
- अगर खाता 'जॉइंटली' मोड में खोला गया है, तो किसी भी लेनदेन के लिए सभी खाताधारकों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं।
- ऐसे खातों में आमतौर पर किसी को भी एटीएम कार्ड जारी नहीं किया जाता, क्योंकि एटीएम से बिना दूसरे की अनुमति के पैसे निकल सकते हैं।
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बैंक
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प्राइमरी और सेकेंडरी अकाउंट होल्डर का नियम
- बैंक आमतौर पर प्राथमिक खाताधारक के नाम पर ही डिफाल्ट रूप से एटीएम कार्ड जारी करता है।
- हालांकि, अगर सेकेंडरी होल्डर भी एटीएम कार्ड चाहता है, तो दोनों खाताधारकों के लिखित आवेदन और सहमति के बाद ही दूसरा डेबिट कार्ड जारी किया जाता है।
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सुरक्षा नियम और लेनदेन की जिम्मेदारी
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सुरक्षा नियम और लेनदेन की जिम्मेदारी
- ज्वाइंट अकाउंट में मिलने वाले दोनों एटीएम कार्डों की पिन और सुरक्षा की जिम्मेदारी खाताधारकों की होती है।
- अगर कोई एक खाताधारक एटीएम से पैसे निकालता है, तो उसका एसएमएस अलर्ट दोनों खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।