शादी टूटने या पति-पत्नी के बीच कानूनी विवाद होने पर अक्सर एलिमनी की बात सामने आती है। आसान भाषा में समझें तो एलिमनी वह आर्थिक मदद है, जो एक पति या पत्नी को दूसरे से मिल सकती है। हालांकि ऐसा नहीं है कि हर तलाक के मामले में पत्नी को अपने आप एलिमनी मिल जाती है। कोर्ट मामले की पूरी स्थिति देखकर फैसला करता है। तो आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में एलिमनी लिया जा सकता है।
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एलिमनी
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हर महिला को अपने आप नहीं मिलती एलिमनी
एलिमनी को लेकर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि तलाक होते ही हर महिला को तय रकम मिलना जरूरी नहीं है। मामला पति-पत्नी की स्थिति और उनकी जरूरतों पर निर्भर करता है। अगर पत्नी के पास अपनी आमदनी नहीं है या उसके लिए अकेले खर्च चलाना मुश्किल है तो वह आर्थिक मदद की मांग कर सकती है।
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नौकरी करने वाली महिला भी मांग सकती है मदद
कई लोगों को लगता है कि नौकरी करने वाली महिला एलिमनी नहीं मांग सकती। लेकिन सिर्फ नौकरी करना ही इसका आधार नहीं होता। महिला की अपनी कमाई और खर्च जैसी बातों को भी देखा जा सकता है। इसी तरह पति की आर्थिक स्थिति भी मायने रखती है।
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एलिमनी का मकसद क्या है?
एलिमनी का मकसद जरूरतमंद पति या पत्नी को आर्थिक सहारा देना होता है, ताकि अलग होने के बाद रोजमर्रा के जरूरी खर्चों को संभालने में परेशानी न हो। इसमें रहने, खाने और दूसरी जरूरी जरूरतों से जुड़े खर्च शामिल हो सकते हैं।
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कितनी एलिमनी मिलेगी?
इसका कोई एक तय जवाब नहीं है। हर पति-पत्नी की आर्थिक स्थिति अलग होती है, इसलिए मदद की रकम भी मामले के हिसाब से अलग हो सकती है। अगर महिला एलिमनी के लिए दावा करती है तो उसकी आर्थिक स्थिति और जरूरत जैसी बातों को ध्यान में रखा जा सकता है। इसलिए तलाक के मामले में एलिमनी को लेकर सबसे आसान बात यही है कि यह कोई ऐसी रकम नहीं है जो हर महिला को अपने आप मिलती है। जरूरत और मामले की स्थिति के आधार पर महिला आर्थिक मदद की मांग कर सकती है।
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