दावों में उलझा धारकलां आईटीआई: तीन बार उद्घाटन फिर भी पढ़ाई नहीं, 65 विद्यार्थी 60 किमी दूर जाने को मजबूर
पठानकोट के धारकलां में आईटीआई की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थियों को बाहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। संस्थान में जरूरी बुनियादी ढांचा पहुंच चुका है।
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पठानकोट के कंडी क्षेत्र धारकलां में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) 10 साल से दावों और उद्घाटनों के बीच उलझा हुआ है। तीन बार उद्घाटन होने के बावजूद संस्थान में नियमित पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
अब चौथी बार इसके उद्घाटन की तैयारी है। धारकलां आईटीआई में दाखिला लेने वाले 65 विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा हासिल करने के लिए करीब 60 किलोमीटर दूर पठानकोट जाना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों को रोजाना अतिरिक्त समय और पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को पठानकोट जाने के लिए बस किराया या निजी वाहन के ईंधन का खर्च उठाना पड़ता है। बस सुविधा प्रभावित होने पर उनकी कक्षाएं छूट जाती हैं। बरसात और खराब मौसम में लंबा सफर विद्यार्थियों के लिए परेशानी के साथ जोखिम भी बढ़ा देता है।
समाजसेवी सुलिंदर सिंह ने कहा कि धारकलां में आईटीआई की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थियों को बाहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। संस्थान में जरूरी बुनियादी ढांचा पहुंच चुका है। फिलहाल पेंट और रखरखाव से जुड़े कुछ काम चल रहे हैं जिन्हें करीब 10 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में संस्थान का उद्घाटन किए जाने की तैयारी है।
दो साल पहले तैयार हुई नई इमारत
आईटीआई का तीन बार उद्घाटन किया जा चुका है लेकिन विद्यार्थियों को एक बार भी नियमित रूप से यहीं पढ़ाई की सुविधा नहीं मिली। करीब दो साल पहले संस्थान की नई इमारत भी तैयार करवाई गई थी। इसके बावजूद कक्षाएं शुरू न होने से विद्यार्थी और अभिभावक निराश हैं। अब चौथी बार उद्घाटन की तैयारी के बीच उनकी उम्मीद है कि इस बार यह केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए और नियमित कक्षाएं शुरू हों।
तकनीकी शिक्षा से रोजगार की उम्मीद
धारकलां आईटीआई पूरी तरह शुरू होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें रोजाना पठानकोट तक आने-जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय और आर्थिक खर्च दोनों बचेंगे। साथ ही तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की मांग है कि संस्थान में नियमित कक्षाओं के साथ सभी जरूरी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएं ताकि आईटीआई खोलने का उद्देश्य पूरा हो सके।