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50 दिन बाद टावर से उतरने को तैयार हुए बुजुर्ग: मौके पर पहुंची थी जिला प्रशासन की टीम, इस आश्वसन पर बनी सहमति
Mon, 12 Oct 2026 08:10 PM IST
शाहिल शर्मा
सूरज प्रकाश, पठानकोट
सूरज प्रकाश, पठानकोट
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 12 Oct 2026 08:10 PM IST
पठानकोट में 100 फीट टावर पर चढ़े बुजुर्ग आखिरकार 50 दिन बाद नीचे उतरने के लिए तैयार हो गए हैं। जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी जिसके बाद बुजुर्गों की जिला प्रशासन से सहमति बनी।
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टावर पर चढ़े दोनों बुजुर्ग
- फोटो : संवाद
विस्तार
कमेटी जैनी जुगियाल के दो बुजुर्ग संघर्षकर्मी आखिरकार 50 दिन बाद टावर से नीचे उतरने को राजी हो गए। माधोपुर-पठानकोट क्षेत्र में करीब 100 फीट ऊंचे टावर पर बैठे 88 वर्षीय शरम सिंह और 83 वर्षीय कुलविंदर सिंह को मनाने के लिए सोमवार को जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने संघर्ष कमेटी के सदस्यों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों के समाधान के लिए एक सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और सरकार के अन्य नेताओं के साथ बैठक करवाने का आश्वासन दिया।
सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे डीसी डॉ. पल्लवी, एसएसपी मनप्रीत सिंह और एडीसी जनरल हरदीप सिंह लुबाना माधोपुर स्थित टॉवर के पास पहुंचे। अधिकारियों ने यूनियन सदस्यों के साथ बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि लंबे समय से लंबित मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद दोनों बुजुर्ग टावर से नीचे उतरने के लिए सहमत हो गए। इसके बाद उन्हें क्रेन की सहायता से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे डीसी डॉ. पल्लवी, एसएसपी मनप्रीत सिंह और एडीसी जनरल हरदीप सिंह लुबाना माधोपुर स्थित टॉवर के पास पहुंचे। अधिकारियों ने यूनियन सदस्यों के साथ बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि लंबे समय से लंबित मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद दोनों बुजुर्ग टावर से नीचे उतरने के लिए सहमत हो गए। इसके बाद उन्हें क्रेन की सहायता से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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15 साल से हक की लड़ाई लड़ रही संघर्ष कमेटी
बैराज संघर्ष ओस्ती कमेटी जैनी जुगियाल पिछले करीब 15 वर्षों से बांध निर्माण के दौरान प्रभावित हुए परिवारों और अपने परिवार के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। कमेटी की प्रमुख मांग है कि शाहपुरकंडी बैराज के निर्माण के दौरान अधिग्रहित की गई जमीनों का उचित मुआवजा दिया जाए और प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। इसके अलावा जिन परिवारों के मकान निर्माण कार्य के कारण ध्वस्त हुए, उनके पुनर्वास और अन्य जायज मांगों पर भी उचित निर्णय लिया जाए।
कमेटी सदस्यों का कहना है कि इतने लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इसी के विरोध में दोनों बुजुर्गों ने टावर पर चढ़कर संघर्ष शुरू किया था और करीब 50 दिनों तक वहीं डटे रहे।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो तेज होगा संघर्ष
टावर से ही जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने दोनों बुजुर्गों ने स्पष्ट किया कि उनकी जायज मांगों का ठोस समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आश्वासन के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुईं तो संघर्ष कमेटी को इससे भी कड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उधर, संघर्ष स्थल पर जिला प्रशासन और भारी पुलिस बल की तैनाती रही। लंबे समय से टावर पर रहने और खराब मौसम का सामना करने के कारण दोनों बुजुर्गों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही थी। अब प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ में बैठक करवाने के आश्वासन के बाद उनके नीचे उतरने की सहमति को इस आंदोलन में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों बुजुर्गों को नीचे उतारकर पहले मेडिकल चेकअप किया जाएगा और उसके बाद उन्हें घरों को रवाना किया जाएगा। प्रशासन की ओर से दोनों बुजुर्गों को मंगलवार सुबह 8 बजे टॉवर से नीचे उतारा जाएगा।
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कमेटी सदस्यों का कहना है कि इतने लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इसी के विरोध में दोनों बुजुर्गों ने टावर पर चढ़कर संघर्ष शुरू किया था और करीब 50 दिनों तक वहीं डटे रहे।
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टावर से ही जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने दोनों बुजुर्गों ने स्पष्ट किया कि उनकी जायज मांगों का ठोस समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आश्वासन के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुईं तो संघर्ष कमेटी को इससे भी कड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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