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Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Ex-ED Officer Niranjan Singh Quits Waris Punjab De 4 Days After Joining Amritpal Singh Party

पूर्व ईडी डिप्टी डायरेक्टर का बड़ा फैसला: 72 घंटे में ही 'वारिस पंजाब दे' से अलग हुए निरंजन सिंह, बताई ये वजह

Mon, 28 Sep 2026 01:32 PM IST
Sharukh Khan सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 28 Sep 2026 01:32 PM IST
सार
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पूर्व ईडी डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह 72 घंटे में ही वारिस पंजाब दे से अलग हो गए हैं। वो तीन दिन पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी के साथ आए थे। अब सोशल मीडिया पर अलग होने का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दे गैर-समझौता योग्य हैं।

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Ex-ED Officer Niranjan Singh Quits Waris Punjab De 4 Days After Joining Amritpal Singh Party
वारिस पंजाब दे से अलग हुए निरंजन सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने अकाली दल वारिस पंजाब दे से तीन दिन में ही अलग होने का एलान किया है। 23 सितंबर को चंडीगढ़ में संगठन में शामिल होने के बाद अब उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर खुद को संगठन से अलग कर लिया। 
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निरंजन सिंह ने अपने ताजा बयान में कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके मतभेद हैं और ये उनके लिए गैर-समझौतायोग्य हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों का आचरण भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति, घटना या विवाद का नाम नहीं लिया और यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके मतभेद किन मुद्दों को लेकर हैं।
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नशे और भ्रष्टाचार समेत चार मुद्दों पर दिया था समर्थन
संगठन में शामिल होने के समय निरंजन सिंह ने नशे, उच्च स्तर के भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और रोजगार को प्रमुख मुद्दे बताते हुए पार्टी के साथ आने की बात कही थी। उन्होंने पंजाब में नशे और भ्रष्टाचार की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब संगठन से अलग होते हुए उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर वह समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने संगठन को शुभकामनाएं देते हुए खुद को उससे अलग करने की बात कही है।
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बहुचर्चित जगदीश भोला ड्रग रैकेट की जांच से चर्चा में आए थे
निरंजन सिंह का नाम पंजाब के बहुचर्चित जगदीश सिंह भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से भी जुड़ा रहा है। ईडी में रहते हुए उन्होंने इस मामले की जांच की थी और दिसंबर 2014 में तत्कालीन पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से पूछताछ की थी।
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इसके बाद जनवरी 2015 में उनका जालंधर से कोलकाता तबादला किया गया था, जिसे लेकर उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। बाद में तबादले पर रोक लग गई थी। वर्ष 2016 में उन्हें ईडी के डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया था। उन्होंने मई 2021 में ईडी से सेवानिवृत्ति ली।

मतभेद का वास्तविक कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं
निरंजन सिंह 23 सितंबर को पूर्व डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों के साथ ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में शामिल हुए थे। दोनों को पार्टी नेताओं ने चंडीगढ़ में संगठन में शामिल कराया था।

अब तीन दिन बाद निरंजन सिंह के अलग होने के एलान से उनके राजनीतिक जुड़ाव का यह पहला चरण समाप्त हो गया है। हालांकि उनके बयान में संगठन से अलग होने की किसी विशेष घटना या व्यक्ति को कारण नहीं बताया गया है। ऐसे में उनके मतभेद का वास्तविक कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
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