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आईएएस शिखर अग्रवाल को नोटिस: सात दिन में मांगा जवाब; पत्नी की संपत्ति पर भी सवाल

Mon, 02 Nov 2026 02:37 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Mon, 02 Nov 2026 02:37 PM IST
सार
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राजस्थान में एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के मामले में कार्मिक विभाग ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने सात दिन में संपत्ति के वित्तीय स्रोत और अचल संपत्ति का ब्योरा देने को कहा है। आरोप है कि सालाना इम्मूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न में संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दी गई।

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IAS Shikhar Agarwal 40 Villas Purchase Notice Rajasthan
प्रशाखा माथुर और शिखर अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के मामले में कार्मिक विभाग ने आईएएस शिखर अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों में जवाब मांगा है। कार्मिक विभाग ने इस नोटिस के माध्यम से अचल संपत्ति का ब्योरा छिपाने और वित्तीय स्रोतों के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। संपत्ति का ब्योरा छिपाने का आरोप सिद्ध होने पर अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।
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इससे पहले, 27 अक्तूबर को पूरे प्रकरण का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर को पद से हटाकर एपीओ (आदेशों की प्रतीक्षा में) कर दिया था। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) भी 31 अक्तूबर को प्राथमिक जांच दर्ज करके विस्तृत छानबीन आरंभ कर चुकी है।
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कंपनी को ही लीज पर दिए गए सभी विला
कार्मिक विभाग के नोटिस के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों तथा सास-ससुर ने मिलकर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से 40 कॉटेज और विला खरीदे थे। इन सभी संपत्तियों का कुल खरीद मूल्य छह करोड़ 16.5 लाख रुपये है। इनमें से 20 विला अलवर जिले के अजबगढ़ में स्थित हैं, जबकि 20 कॉटेज उदयपुर जिले के बुझड़ा में खरीदे गए हैं। खरीद के तुरंत बाद यह पूरी प्रॉपर्टी उसी विक्रेता कंपनी को वापस लीज पर सौंप दी गई। लीज अनुबंध के तहत बुझड़ा के 20 कॉटेज चार लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना और अजबगढ़ के 20 विला पांच लाख रुपये प्रति विला सालाना की दर से दिए गए हैं। इस लीज व्यवस्था से अधिकारियों के परिवार को हर साल कुल 1.80 करोड़ रुपये की निश्चित आय प्राप्त हो रही है।
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संपत्ति रिटर्न में ब्योरा छिपाने का आरोप
आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर के नाम पर अजबगढ़ और बुझड़ा में कुल मिलाकर 28 विला और कॉटेज पंजीकृत हैं। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सालाना इम्मूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (आईपीआर) में केवल 14 संपत्तियों की ही जानकारी दी गई है। शिखर अग्रवाल ने इस वर्ष 7 जनवरी को भरे गए अपने आईपीआर में 14 विला-कॉटेज का ब्योरा दर्शाया था। इसके विपरीत उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर की ओर से 8 जनवरी 2026 को भरे गए आईपीआर में संपत्ति की सूचना शून्य दर्ज की गई है, जबकि उनके नाम पर भी 14 विला-कॉटेज खरीदे गए हैं। शिखर अग्रवाल का दावा है कि उन्होंने संपत्ति रिटर्न का पूरा ब्योरा विभाग को भेजा था, लेकिन विभाग ने उसे रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया।


सेवा नियमों के उल्लंघन पर निलंबन संभव
कार्मिक विभाग ने नोटिस में वित्तीय स्रोत का खुलासा करने के साथ-साथ डॉ. प्रशाखा माथुर के नाम पंजीकृत संपत्तियों को आईपीआर में प्रदर्शित न करने पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से जवाब मिलने के पश्चात कार्मिक विभाग आगामी निर्णय लेकर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। सरकारी सेवा नियमों के तहत अचल संपत्ति की जानकारी छिपाना नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर राज्य सरकार दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का कदम भी उठा सकती है। 
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