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राजस्थान निकाय चुनाव: पहले चरण का प्रचार थमा, अब डोर-टू-डोर संपर्क का दौर
Mon, 07 Sep 2026 08:07 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 07 Sep 2026 08:07 PM IST
राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण का प्रचार सोमवार शाम 6 बजे थम गया। 9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान होगा। अब डोर-टू-डोर संपर्क ही विकल्प रहेगा।
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निकाय चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण वाले क्षेत्रों में सोमवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार थम गया। इसके साथ ही सार्वजनिक सभा, रैली, रोड शो, जुलूस और लाउडस्पीकर के जरिए प्रचार पर रोक लग गई है। अब 9 सितंबर को होने वाले मतदान तक प्रत्याशियों के लिए व्यक्तिगत संपर्क और मतदान की तैयारियां ही सबसे अहम रहेंगी।
पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों में मतदान होगा। इनमें 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इन निकायों में पार्षद पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 सितंबर को की जाएगी।
48 घंटे का साइलेंस पीरियड शुरू
राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले सार्वजनिक चुनाव प्रचार पर रोक रहती है। अब प्रत्याशी सार्वजनिक मंचों से वोट की अपील नहीं कर सकेंगे। न रैली होगी, न सभा और न ही लाउडस्पीकर से प्रचार किया जा सकेगा।
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प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता अब मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन प्रत्याशियों का घर-घर जाकर वोट मांगने का सिलसिला जारी रहेगा।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के अनुसार पहले चरण के मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की हैं।
बाहरी नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़ना होगा क्षेत्र
साइलेंस पीरियड शुरू होने के साथ चुनाव वाले क्षेत्रों में बाहरी राजनीतिक नेताओं और ऐसे कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर भी रोक लागू हो जाती है, जो संबंधित क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं और प्रचार के लिए वहां पहुंचे हैं।
राजनीतिक दलों को ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्धारित समय के बाद चुनाव क्षेत्र से बाहर भेजना होगा। प्रशासन और पुलिस उनकी आवाजाही पर नजर रखेंगे। हालांकि, संबंधित क्षेत्र के स्थानीय निवासी और मतदाता वहां सामान्य रूप से रह सकते हैं।
सोशल मीडिया प्रचार पर भी नजर
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद सार्वजनिक रूप से वोट मांगने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। रैली और सभाओं के साथ लाउडस्पीकर, डीजे और दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर भी रोक होगी।
सोशल मीडिया पर भी चुनावी अपील या मतदाताओं को किसी प्रत्याशी अथवा दल के पक्ष में प्रभावित करने वाली प्रचार सामग्री को लेकर आयोग के नियम लागू होंगे। प्रशासन और पुलिस शराब, नकदी, उपहार या अन्य माध्यमों से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर भी नजर रखेंगे। मतदान केंद्रों के आसपास भी किसी तरह की चुनावी अपील या मतदाताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।
यह भी पढें-पार्षद की कुर्सी छोटी, सियासी दांव बड़ा... राजस्थान की राजनीति में निकाय चुनाव क्यों बनते हैं ‘लॉन्चिंग पैड’?
9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान
पहले चरण में 9 सितंबर को 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाओं में मतदान होगा। इनमें बीकानेर, अलवर, भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम शामिल हैं।
नगर परिषदों में नागौर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर, बाड़मेर और ब्यावर समेत अन्य निकाय शामिल हैं।
134 नगर पालिकाओं में अजमेर जिले की केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद और सावर से लेकर जयपुर जिले की बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों की नगर पालिकाएं शामिल हैं।
अब प्रत्याशियों की सीधी परीक्षा
सार्वजनिक प्रचार का समय खत्म होने के बाद प्रत्याशियों के लिए आखिरी 48 घंटे बेहद अहम होंगे। अब भीड़ जुटाने और बड़े कार्यक्रमों की जगह व्यक्तिगत संपर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान के दिन मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर रहेगा। यानी पहले चरण के चुनाव में सोमवार शाम के बाद प्रचार का शोर जरूर थम गया है, लेकिन प्रत्याशियों की असली चुनावी दौड़ अब आखिरी दौर में पहुंच गई है।
पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों में मतदान होगा। इनमें 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इन निकायों में पार्षद पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 सितंबर को की जाएगी।
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48 घंटे का साइलेंस पीरियड शुरू
राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले सार्वजनिक चुनाव प्रचार पर रोक रहती है। अब प्रत्याशी सार्वजनिक मंचों से वोट की अपील नहीं कर सकेंगे। न रैली होगी, न सभा और न ही लाउडस्पीकर से प्रचार किया जा सकेगा।
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प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता अब मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन प्रत्याशियों का घर-घर जाकर वोट मांगने का सिलसिला जारी रहेगा।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के अनुसार पहले चरण के मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की हैं।
बाहरी नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़ना होगा क्षेत्र
साइलेंस पीरियड शुरू होने के साथ चुनाव वाले क्षेत्रों में बाहरी राजनीतिक नेताओं और ऐसे कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर भी रोक लागू हो जाती है, जो संबंधित क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं और प्रचार के लिए वहां पहुंचे हैं।
राजनीतिक दलों को ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्धारित समय के बाद चुनाव क्षेत्र से बाहर भेजना होगा। प्रशासन और पुलिस उनकी आवाजाही पर नजर रखेंगे। हालांकि, संबंधित क्षेत्र के स्थानीय निवासी और मतदाता वहां सामान्य रूप से रह सकते हैं।
सोशल मीडिया प्रचार पर भी नजर
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद सार्वजनिक रूप से वोट मांगने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। रैली और सभाओं के साथ लाउडस्पीकर, डीजे और दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर भी रोक होगी।
सोशल मीडिया पर भी चुनावी अपील या मतदाताओं को किसी प्रत्याशी अथवा दल के पक्ष में प्रभावित करने वाली प्रचार सामग्री को लेकर आयोग के नियम लागू होंगे। प्रशासन और पुलिस शराब, नकदी, उपहार या अन्य माध्यमों से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर भी नजर रखेंगे। मतदान केंद्रों के आसपास भी किसी तरह की चुनावी अपील या मतदाताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।
यह भी पढें-पार्षद की कुर्सी छोटी, सियासी दांव बड़ा... राजस्थान की राजनीति में निकाय चुनाव क्यों बनते हैं ‘लॉन्चिंग पैड’?
9 सितंबर को 162 निकायों में मतदान
पहले चरण में 9 सितंबर को 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाओं में मतदान होगा। इनमें बीकानेर, अलवर, भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम शामिल हैं।
नगर परिषदों में नागौर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर, बाड़मेर और ब्यावर समेत अन्य निकाय शामिल हैं।
134 नगर पालिकाओं में अजमेर जिले की केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद और सावर से लेकर जयपुर जिले की बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों की नगर पालिकाएं शामिल हैं।
अब प्रत्याशियों की सीधी परीक्षा
सार्वजनिक प्रचार का समय खत्म होने के बाद प्रत्याशियों के लिए आखिरी 48 घंटे बेहद अहम होंगे। अब भीड़ जुटाने और बड़े कार्यक्रमों की जगह व्यक्तिगत संपर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान के दिन मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर रहेगा। यानी पहले चरण के चुनाव में सोमवार शाम के बाद प्रचार का शोर जरूर थम गया है, लेकिन प्रत्याशियों की असली चुनावी दौड़ अब आखिरी दौर में पहुंच गई है।