राजस्थान: अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की जन-सुनवाई प्रक्रिया पर सवाल, 2 सांसदों व एलओपी ने जताई आपत्ति
अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की जन-सुनवाई और क्षेत्र भ्रमण पर राजकुमार रोत, टीकाराम जूली और अमराराम ने सवाल उठाए। रिपोर्ट की समयसीमा बढ़ाने की मांग।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की जन-सुनवाई और क्षेत्र भ्रमण को लेकर राजस्थान के तीन जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं। बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सीकर सांसद अमराराम ने समिति को पत्र लिखकर 31 अगस्त की रिपोर्ट की समयसीमा बढ़ाने और प्रभावित गांवों में व्यापक जन-सुनवाई की मांग की है।
सांसद रोत बोले- चार शहरों तक सीमित रही सुनवाई
राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि समिति ने गुड़गांव, अलवर, अजमेर और उदयपुर में ही जन-सुनवाई की, जिससे दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण अपनी बात नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि उदयपुर की सुनवाई का समय अचानक बदलने से बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ के ग्रामीण प्रभावित हुए।
रोत ने कोटपूतली-बहरोड़ के जोधपुरा गांव का दौरा नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने मांग की कि सभी अरावली जिलों में ग्रामीणों से आमने-सामने बातचीत की जाए और स्वतंत्र स्वास्थ्य व पर्यावरण अध्ययन होने तक नए खनन पट्टों पर रोक लगाई जाए।
एलओपी टीकाराम जूली ने खनन प्रभावित गांवों का दौरा नहीं करने पर घेरा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली क्षेत्र में शामिल राजस्थान के जिलों को लेकर अलग-अलग सरकारी रिपोर्टों में अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति की फील्ड ट्रिप में खनन और स्टोन क्रशिंग से प्रभावित गांवों के बजाय अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों की बात ज्यादा सुनी गई। जूली ने कोटपूतली के जोधपुरा गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि रूट प्लान में शामिल होने के बावजूद समिति वहां नहीं गई। उन्होंने अरावली की मौजूदा 100 मीटर वाली परिभाषा की समीक्षा, नए खनन पट्टों पर रोक और नियमों का उल्लंघन करने वाली खदानों पर कार्रवाई की मांग की।
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सीपीआई(एम) सांसद अमराराम बोले- शेखावाटी में भूजल संकट की अनदेखी
सीकर सांसद अमराराम ने आरोप लगाया कि सीकर, कोटपूतली और झुंझुनूं के दौरे में समिति ने सीमित समय दिया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से कई इलाकों में भूजल स्तर 1000 फीट से नीचे चला गया है और सोटा व कातली जैसी नदियां सूख रही हैं। अमराराम ने सलयोद्रा गांव में सिलिकोसिस से मौतों का मुद्दा उठाते हुए गिरजन नदी क्षेत्र का दौरा नहीं किए जाने पर भी सवाल किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों को माइनिंग-मुक्त करने और नदी पुनरुद्धार की मांग की।