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Jhalawar News: 500 पौधों पर QR कोड लगाकर किया कमाल, शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन को मिलेगा राष्ट्रपति सम्मान

Sat, 22 Aug 2026 05:21 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़ Published by: प्रिया वर्मा Updated Sat, 22 Aug 2026 05:21 PM IST
सार
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सरकारी स्कूल में पढ़ाई को तकनीक, पर्यावरण और वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ने वाले डॉ. दिव्येंदु सेन ने जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनके नवाचारों के चलते उन्हें देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान के लिए चुना गया है।

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Jhalawar News: Teacher Dr. Divyendu Sen to Receive President’s Award After QR-Coding 500 Plants
डॉ. दिव्येंदु सेन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भवानीमंडी के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के जीव विज्ञान व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन का चयन प्रतिष्ठित राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान के लिए हुआ है। देशभर से चयनित 48 शिक्षकों की सूची में राजस्थान से जगह बनाने वाले वे दूसरे शिक्षक हैं, जबकि झालावाड़ जिले से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाले वे पहले शिक्षक हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 सितंबर को नई दिल्ली में उन्हें सम्मानित करेंगी।

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डॉ. सेन ने अपने विद्यालय को आधुनिक डिजिटल प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने के साथ शिक्षण को तकनीक और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा है। उनके नवाचारों ने विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ विद्यालय की पहचान भी मजबूत की है।
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QR कोड से 500 पेड़-पौधों की डिजिटल निगरानी
विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की उपस्थिति और नामांकन बनाए रखने के उद्देश्य से डॉ. सेन ने करीब 500 पेड़-पौधों पर विशेष QR कोड लगाए हैं। स्मार्टफोन से किसी भी पौधे का QR कोड स्कैन करते ही उसके वैज्ञानिक नाम, पारिस्थितिक महत्व और उपयोगिता की जानकारी मिल जाती है।
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विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए पौधों से जुड़ी जानकारी हाड़ौती और मालवी भाषा में ऑडियो संदेशों के रूप में भी उपलब्ध कराई गई है। इस पहल की शुरुआत करीब दो वर्ष पहले विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा के सहयोग से हुई थी। तत्कालीन जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी एक पौधे के लिए अपनी आवाज में ऑडियो संदेश रिकॉर्ड कर इस पहल को समर्थन दिया था।

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छात्रों ने खोजे 12 दुर्लभ क्षुद्रग्रह
डॉ. सेन के मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने विज्ञान के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके दो छात्र श्रेयांस और आरुष आस्तोलिया ने 12 दुर्लभ क्षुद्रग्रहों की पहचान करने में सफलता हासिल की। दोनों विद्यार्थियों को नासा की वरिष्ठ वैज्ञानिक और जेट प्रोपल्शन लैब की डिप्टी डायरेक्टर रोजली लोपेज के साथ ऑनलाइन संवाद का अवसर भी मिला। इस दौरान विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान, रिंग ऑफ फायर और बृहस्पति ग्रह के ज्वालामुखियों सहित विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनके जवाब वैज्ञानिक ने दिए।

कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं डॉ. सेन
तकनीक और शिक्षा के बेहतर समन्वय के लिए डॉ. दिव्येंदु सेन को पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने गूगल एजुकेटर लेवल-1 की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की। इसके अलावा उन्हें हाड़ौती गौरव शिक्षक सम्मान, रिलायंस फाउंडेशन बेस्ट टीचर अवॉर्ड और पर्यावरण पद्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सेन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई सम्मेलनों में भी सहभागिता कर चुके हैं। राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान के लिए उनका चयन शिक्षा में नवाचार, तकनीक के इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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