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Khabaron Ke Khiladi: चुनाव की कैसी तैयारी, संघ का कितना असर? विश्लेषकों ने बताया- 'नवीन' टीम से क्या बदलेगा
Sat, 22 Aug 2026 09:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 22 Aug 2026 09:04 PM IST
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नितिन नवीन की नई टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा की नई 65 सदस्यीय टीम की घोषणा के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल है। पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव और मोर्चा स्तर तक पर पदाधिकारियों में बड़ा बदलाव किया है। खबरों के खिलाड़ी में इस हफ्ते इन्हीं संगठनात्मक फेरबदल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की इसमें भूमिका और आगामी चुनावों की रणनीतियों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
पीयूष पंत: भाजपा का संगठनात्मक बदलाव काफी देरी से हुआ है, लेकिन यह 'देर आए दुरुस्त आए' जैसा है। जेन-जी के सफल आंदोलनों ने सरकार और संगठन दोनों को परेशान किया, जिसके बाद पीएम मोदी ने वीडियो जारी कर नई पीढ़ी को संबोधित किया। नई टीम में 65 में से 51 नए चेहरे लाकर संगठन को ऊर्जावान बनाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही, अनुभवी विनोद तावड़े और सुनील बंसल को बरकरार रखा गया है। सोशल मीडिया टीम में बदलाव कर आक्रामक चेहरों को लाया गया है। इस पूरी नई टीम में संघ का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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पीयूष पंत: भाजपा का संगठनात्मक बदलाव काफी देरी से हुआ है, लेकिन यह 'देर आए दुरुस्त आए' जैसा है। जेन-जी के सफल आंदोलनों ने सरकार और संगठन दोनों को परेशान किया, जिसके बाद पीएम मोदी ने वीडियो जारी कर नई पीढ़ी को संबोधित किया। नई टीम में 65 में से 51 नए चेहरे लाकर संगठन को ऊर्जावान बनाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही, अनुभवी विनोद तावड़े और सुनील बंसल को बरकरार रखा गया है। सोशल मीडिया टीम में बदलाव कर आक्रामक चेहरों को लाया गया है। इस पूरी नई टीम में संघ का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: भाजपा इस टीम के जरिए विपक्ष को उसी की आक्रामक भाषा में जवाब देने की पूरी तैयारी कर रही है। संगठन में स्मृति ईरानी की वापसी इसका मुख्य संकेत है, जो 2024 के बाद नेपक्ष्य में चली गई थीं। राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव से पार्टी के भीतर जो घबराहट है, उसे काउंटर करने के लिए स्मृति ईरानी को वापस जमीन पर उतारा गया है। इसी तरह राम माधव की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वापसी दर्शाती है कि आरएसएस संगठन पर अपना नियंत्रण बढ़ा रहा है। बीएल संतोष का कद कम करने के लिए दो सचिव जोड़े गए हैं और अमित मालवीय को हटा दिया गया है।
राकेश शुक्ल: भाजपा की नई टीम में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया है। यह नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी शोले फिल्म के जेलर असरानी के उस प्रसिद्ध संवाद की याद दिलाती है जिसमें वे कहते हैं 'आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ'। इस बड़े बदलाव से स्पष्ट है कि संघ और भाजपा के बीच संवादहीनता काफी बढ़ गई है। संगठन महामंत्री पद पर बीएल संतोष की पुनर्नियुक्ति बिना संघ की सहमति के हुई है, जो इस बढ़ती दूरी का प्रमाण है। भाजपा अब खुद को बहुत बड़ी पार्टी मानने लगी है और संघ से दूरी बना रही है।
राकेश शुक्ल: भाजपा की नई टीम में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया है। यह नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी शोले फिल्म के जेलर असरानी के उस प्रसिद्ध संवाद की याद दिलाती है जिसमें वे कहते हैं 'आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ'। इस बड़े बदलाव से स्पष्ट है कि संघ और भाजपा के बीच संवादहीनता काफी बढ़ गई है। संगठन महामंत्री पद पर बीएल संतोष की पुनर्नियुक्ति बिना संघ की सहमति के हुई है, जो इस बढ़ती दूरी का प्रमाण है। भाजपा अब खुद को बहुत बड़ी पार्टी मानने लगी है और संघ से दूरी बना रही है।
अनुराग वर्मा: 55 वर्ष की औसत आयु वाली इस टीम में युवाओं और पुराने लोगों का अच्छा तालमेल है। जब कोई संगठन बड़ा होता है, तो वह भविष्य के नेतृत्व के लिए नई पौध तैयार करता है। पहले भाजपा में बाहर से आने वाले लोगों को पद नहीं मिलते थे, लेकिन अब बाहरी लोगों के आने के कारण उन्हें भी संगठन में जगह देकर समायोजित करना जरूरी हो गया है। पार्टी के पास अब इतनी बड़ी शक्ति है कि वह भविष्य की नई टीम को प्रशिक्षित कर सकती है। स्मृति ईरानी को वापस लाना मास्टर स्ट्रोक है, क्योंकि वे अमेठी में राहुल को हराने की प्रतीक हैं।
विनोद अग्निहोत्री: नए अध्यक्ष के साथ काम करने के लिए उम्र और केमिस्ट्री का मिलना जरूरी होता है, इसलिए 51 नए चेहरों को शामिल किया गया है, ताकि नितिन नवीन बिना असहजता के काम ले सकें। ऐतिहासिक रूप से, भाजपा ने हमेशा नए चेहरों को आगे बढ़ाया है, जैसे प्रमोद महाजन और सुषमा स्वराज जैसे नेता उभरे और बाद में स्थापित हुए। बीएल संतोष की स्थिति संघ तय करता है। सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे जैसे राजस्थान के नेताओं को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। सुषमा स्वराज के जाने के बाद जो मुखर महिला नेता की कमी थी, उसे स्मृति ने पूरा किया है।
विनोद अग्निहोत्री: नए अध्यक्ष के साथ काम करने के लिए उम्र और केमिस्ट्री का मिलना जरूरी होता है, इसलिए 51 नए चेहरों को शामिल किया गया है, ताकि नितिन नवीन बिना असहजता के काम ले सकें। ऐतिहासिक रूप से, भाजपा ने हमेशा नए चेहरों को आगे बढ़ाया है, जैसे प्रमोद महाजन और सुषमा स्वराज जैसे नेता उभरे और बाद में स्थापित हुए। बीएल संतोष की स्थिति संघ तय करता है। सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे जैसे राजस्थान के नेताओं को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। सुषमा स्वराज के जाने के बाद जो मुखर महिला नेता की कमी थी, उसे स्मृति ने पूरा किया है।