हिमकेयर मामला: डॉ. जनकराज से चार घंटे पूछताछ, विजिलेंस ने थमाई 15 पन्नों की प्रश्नावली
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से गठित एसआईटी ने आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज से गुरुवार को पूछताछ की। ब्यूरो के अनुसार पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों पर उनके जवाब टालमटोल वाले और अस्पष्ट पाए गए। कई मामलों में आवश्यक विशिष्ट तथ्य भी उपलब्ध नहीं करवाए गए।
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हिमकेयर योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहे विजिलेंस ब्यूरो की विशेष जांच टीम ने वीरवार को इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला के पूर्व एमएस और भरमौर से भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से पूछताछ की। विजिलेंस मुख्यालय खलीनी में एसआईटी ने उनसे चार घंटे पूछताछ की और कई सवाल किए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर टीम ने उन्हें 15 पन्नों की प्रश्नावली थमाई है और लिखित जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है।
डॉ. जनक सुबह 11:15 बजे विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे। इसके बाद जांच टीम ने अपराह्न 3:15 बजे तक उनसे हिमकेयर दावों, बिलों की जांच, भुगतान प्रक्रिया, प्रशासनिक फैसलों और खरीद टेंडर से जुड़े सवाल किए। उनसे यह भी पूछा गया कि योजना के सही क्रियान्वयन में अहम जिम्मेवारी आपकी थी, बावजूद इसके दवाओं के टेंडर प्रक्रिया में कमियां क्यों रही? इस पर डॉ. जनक ने कहा कि पुराना रिकॉर्ड देखे बिना वह सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब नहीं दे सकते। विजिलेंस यह जांच भी कर रही है कि वर्ष 2018 के बाद संस्थान में खरीद और निविदा प्रक्रिया की किस तरह समीक्षा हुई।
पूछताछ के बाद डॉ. जनकराज ने कहा कि उनसे हिमकेयर योजना से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल पूछे गए, जिनके जवाब उन्होंने अपनी जानकारी के अनुसार दिए। उन्होंने बताया कि वह नौकरी छोड़ चुके हैं और संबंधित रिकॉर्ड आईजीएमसी में मौजूद है। उन्होंने मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार न्यायिक जांच नहीं करवाती है, तो भाजपा सरकार बनने पर उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका
हिमकेयर योजना में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जांच में ऐसे निजी अस्पतालों को योजना के तहत इंपैनल किए जाने के तथ्य सामने आए हैं, जिनकी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में दो कमरों में संचालित होने वाले और पर्याप्त सुविधाएं न होने के बावजूद कुछ अस्पतालों को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद इन अस्पतालों में मरीजों के उपचार, बिलिंग और सरकार से किए गए दावों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। विजिलेंस अलग-अलग अस्पतालों में मरीजों की संख्या, उपचार का रिकॉर्ड, बिलिंग और सरकार की ओर से जारी भुगतान का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि अस्पतालों के इंपैनलमेंट के दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
भाजपा के दो विधायकों और तीन पूर्व एमएलए से हो चुकी है पूछताछ
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस में केस दर्ज है। उनसे इस मामले में विजिलेंस ने मंगलवार को पूछताछ की थी। वहीं, आशीष शर्मा से एक अन्य मामले में पूछताछ हो चुकी है। इसके अलावा, पूर्व विधायक होशियार सिंह से सरकारी धन के दुरुपयोग मामले में विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। वहीं, पूर्व विधायक केएल ठाकुर और चैतन्य शर्मा से भी अलग-अलग मामलों में पूछताछ की जा चुकी है।
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