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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती को जनहित बैँकिंग जरूरी : यूएफबीयू
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मुनाफा नहीं जनता की कमाई सुरक्षित रखना हो उद्देश्य
खाते में न्यूनतम राशि के नाम पर पैसे काटने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) हिमाचल इकाई ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में सुधार के लिए समय रहते उचित कदम उठाने की मांग की है। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती के लिए जनहित बैंकिंग जरूरी है। यूएफबीयू के संयोजक नरेंद्र शर्मा, एआईबीओसी हिमाचल के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा और महासचिव खेम राज वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि बैंकिंग सुधारों का मुख्य उद्देश्य निजी मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि आम जनता की कमाई को सुरक्षित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएसबी कॉन्फ्रेंस-2026 में प्रतिस्पर्धा, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई है।
बैंकों में कॉरपोरेट गवर्नेंस और सही प्रतिनिधित्व से जुड़े मूल सवालों का समाधान होना चाहिए। बैंक बोर्डों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को तुरंत भरना चाहिए। उन्होंने बैंक मुनाफे में पारदर्शिता और आउटसोर्सिंग पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की। उन्होंने बैंकों के जमाकर्ताओं पर अनावश्यक सेवा शुल्क, न्यूनतम शेष राशि के नाम पर काटे जा रहे पैसों, बुनियादी बैंकिंग सेवाओं को महंगा किए जाने का विरोध किया। उन्होंने बैंकों में बड़े पैमाने पर चल रही आउटसोर्सिंग ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थायी भर्तियां किए जाने पर जोर दिया। फोरम ने कृषि, एमएसएमई, विनिर्माण और रोजगार से जुड़े उत्पादक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने, पीएसबी सुधारों से जुड़ी किसी भी विशेषज्ञ समिति में बैंक कर्मियों, किसानों, उपभोक्ताओं और जनहित विशेषज्ञों को शामिल करने, रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग को उठाया।
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खाते में न्यूनतम राशि के नाम पर पैसे काटने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) हिमाचल इकाई ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में सुधार के लिए समय रहते उचित कदम उठाने की मांग की है। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती के लिए जनहित बैंकिंग जरूरी है। यूएफबीयू के संयोजक नरेंद्र शर्मा, एआईबीओसी हिमाचल के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा और महासचिव खेम राज वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि बैंकिंग सुधारों का मुख्य उद्देश्य निजी मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि आम जनता की कमाई को सुरक्षित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएसबी कॉन्फ्रेंस-2026 में प्रतिस्पर्धा, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई है।
बैंकों में कॉरपोरेट गवर्नेंस और सही प्रतिनिधित्व से जुड़े मूल सवालों का समाधान होना चाहिए। बैंक बोर्डों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को तुरंत भरना चाहिए। उन्होंने बैंक मुनाफे में पारदर्शिता और आउटसोर्सिंग पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की। उन्होंने बैंकों के जमाकर्ताओं पर अनावश्यक सेवा शुल्क, न्यूनतम शेष राशि के नाम पर काटे जा रहे पैसों, बुनियादी बैंकिंग सेवाओं को महंगा किए जाने का विरोध किया। उन्होंने बैंकों में बड़े पैमाने पर चल रही आउटसोर्सिंग ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थायी भर्तियां किए जाने पर जोर दिया। फोरम ने कृषि, एमएसएमई, विनिर्माण और रोजगार से जुड़े उत्पादक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने, पीएसबी सुधारों से जुड़ी किसी भी विशेषज्ञ समिति में बैंक कर्मियों, किसानों, उपभोक्ताओं और जनहित विशेषज्ञों को शामिल करने, रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग को उठाया।
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