हिमाचल: चंबा में पहली बार सामने आया कैस्पियन कोबरा का जहरीला दंश, दो लोगों की मौत; एंटी स्नेक वेनम पर भी सवाल
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में कैस्पियन कोबरा के दंश से दो लोगों की मौत के मामलों की पहली वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल में प्रकाशित शोध के अनुसार, चंबा में इस सांप के दंंश से दो लोगों की मौत हुई, जबकि दो अन्य पीड़ितों के बचने के मामले भी दर्ज किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर कैस्पियन कोबरा को ‘खड़पा’ नाम से जाना जाता है। जानें विस्तार से...
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में कैस्पियन कोबरा के जहरीले दंश से मौत के दो मामलों की पहली बार वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल के हाल ही के अंक में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि कैस्पियन कोबरा (नाजा ऑक्सियाना) के दंश से चंबा में दो लोगों की मौत हुई, जबकि दो अन्य पीड़ितों के बचने के मामले भी दर्ज किए गए हैं। शोध के लेखक हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के उपनिदेशक एवं राज्य महामारी विज्ञानी डॉ. ओमेश कुमार भारती हैं।
शोध के अनुसार भारत में अब तक कैस्पियन कोबरा के दंश से मौत की रिपोर्ट नहीं हुई थी। चंबा जिले में इसकी मौजूदगी की आनुवंशिक पुष्टि वर्ष 2019 में हुई थी। यह सांप मुख्य रूप से चंबा की पीर पंजाल पर्वतमाला में करीब 2000 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। शोध में इसे स्थानीय स्तर पर ‘खड़पा’ नाम से भी जाना जाता बताया गया है।
शोध में दर्ज पहले मामले में भरमौर क्षेत्र के उल्लांसा गांव का 40 वर्षीय व्यक्ति 6 जुलाई 2020 को सेब के बगीचे में दवा का छिड़काव करते समय सांप पर पैर पड़ने से दो बार डंस गया। उसे सांस लेने में परेशानी हुई और वह पहले स्थानीय धार्मिक उपचारकर्ता के पास गया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
दूसरा मामला चुराह घाटी के भांजरारू गांव का है। 7 जुलाई 2021 को 62 वर्षीय व्यक्ति काम पर जाते समय कैस्पियन कोबरा पर पैर रख बैठा और बाएं पैर में डंक लग गया। वह करीब आधे घंटे में ही बेहोश होकर गिर पड़ा और अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में भी सांप के दंश के निशान मिले।
शोधकर्ता के अनुसार भारत में सामान्य तौर पर उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम देश के प्रमुख चार जहरीले सांपों नाग, रसेल वाइपर, करैत और फुरसे के विष को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। अध्ययन में उद्धृत शोध के अनुसार उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम कैस्पियन कोबरा के विष को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय नहीं कर सकता। इसके विष में मौजूद कुछ प्रमुख विषैले घटकों के प्रति एंटीवेनम की प्रतिक्रिया कमजोर पाई गई है। शोध में यह भी उल्लेख है कि कैस्पियन कोबरा के विष का हृदय पर तीव्र प्रभाव पड़ सकता है। अध्ययन में शामिल दो मौतों में एक व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ी, जबकि दूसरे की डंक लगने के करीब 72 घंटे के भीतर मौत हुई।
रिपोर्ट में कैस्पियन कोबरा के डंक से बचने वाले दो लोगों के मामलों का भी उल्लेख है। दोनों को सांप पकड़ते समय हाथ पर दंश लगा था। इनमें से एक 2001 में और दूसरा 2006 में डंसा था। अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध नहीं होने पर स्थानीय जड़ी-बूटी से तैयार लेप और सेवन का इस्तेमाल किया गया था। इस जड़ी-बूटी की पहचान मिर्चाड़ी (पेर्गुलेरिया डेमिया) के रूप में की गई है। हालांकि शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि इसके सांप के विष पर प्रभाव को लेकर अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
अध्ययन में खास तौर पर चेताया गया है कि कैस्पियन कोबरा के दोनों घातक दंश दिन के समय हुए और दोनों दुर्घटनावश सांप पर पैर पड़ने के कारण हुए। शोधकर्ताओं ने स्थानीय लोगों को इसके खतरे के प्रति जागरूक करने और सांप के डंक के बाद धार्मिक उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी है।