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लकड़ी तस्करी पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार को कहा- लाचारी नहीं, आधुनिक तकनीक से बचाएं जंगल

Thu, 08 Oct 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 08 Oct 2026 05:00 AM IST
सार
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मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार और वन विभाग को कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने वन संपदा की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल न करने और सिर्फ लाचारी जताने पर वन विभाग को फटकार भी लगाई है।

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High Court tough on forest smuggling: Says protect forests using modern technology, not excuses of helplessnes
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में अवैध रूप से लकड़ी और वन संपदा की ढुलाई और तस्करी के मामलों पर गहरा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार और वन विभाग को कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने वन संपदा की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल न करने और सिर्फ लाचारी जताने पर वन विभाग को फटकार भी लगाई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि जनवरी 2025 से 7 जून 2026 के बीच विभिन्न थानों में वन अपराधों से जुड़े 44 मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अंब रेंज में 102 वाहन और भरमौर रेंज में 172 वाहन बिना वैध अनुमति (अवैध रूप से) वन उपज ले जाते हुए पाए गए हैं। इसके विपरीत, गगरेट वन चेक पोस्ट से उचित और सत्यापित ट्रांजिट परमिट के साथ 6,201 वाहनों ने कानूनी रूप से पार किया है। अदालत के सामने रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (अंब) की एक रिपोर्ट भी आई, जिसमें बताया गया कि वर्तमान चेक पोस्ट के पास कुछ ऐसे ''ब्लाइंड स्पॉट्स'' हैं, जिनका फायदा उठाकर वन तस्कर चौकियों को बाईपास कर जाते हैं।

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सरकार को  सभी बिंदुओं पर जवाब दाखिल करना होगा
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि यदि चेक पोस्ट को लगभग 3 किलोमीटर आगे नए प्रस्तावित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए, तो अंबोटा-होशियारपुर मार्ग से बचने वाले वाहनों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। अदालत ने संबंधित एसडीएम से इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। हाई कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सरकार के हलफनामे में यह साफ नहीं है कि अवैध वन उपज ले जाते हुए पकड़े गए वाहनों का क्या किया गया। अदालत ने सरकार से पूछा है कि क्या इन वाहनों को उनके पंजीकृत मालिकों को वापस सौंप दिया गया या कानून के अनुसार इनका निपटारा किया गया। एसपी द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में भी कई एफआईआर का जिक्र है, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गाड़ियों की ताजा स्थिति बताने को कहा है। अदालत ने कहा कि वन विभाग ने अपने अनुपालन हलफनामे में पेड़ों और वाहनों की गिनती को लेकर लाचारी दिखाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग को यह बताना चाहिए कि आधुनिक तकनीक में सुधार करके वन संपदा का बेहतर प्रबंधन कैसे किया जा सकता है। कोर्ट ने इस संबंध में उठाए जा सकने वाले कदमों पर नया हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर 2026 की तारीख तय की है, तब तक सरकार को इन सभी बिंदुओं पर जवाब दाखिल करना होगा।

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