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अवैध टेलीकाम एक्सचेंज का पर्दाफाश: चीनी सिम बॉक्स से लोन वसूली के लिए देते थे धमकी, मैनेजर सहित दो गिरफ्तार
Thu, 22 Oct 2026 04:03 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 22 Oct 2026 04:03 PM IST
आगरा में पुलिस ने अवैध सिम बॉक्स से चल रही टेलीकाम एक्सचेंज के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। गिरोह लोन रिकवरी के नाम पर धमकाता था। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-12 स्थित सत्यम प्लाजा में बृहस्पतिवार को पुलिस और एसओजी ने एक अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को दबोच लिया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल (एनसीआरपी) और दूरसंचार विभाग से मिले इनपुट के बाद यह कार्रवाई की गई। इस सेटअप के जरिये पिछले छह महीने से इंटरनेट कॉल को सिम बॉक्स से स्थानीय कॉल में बदलकर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा था।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी खंदारी के नसीराबाद कॉलोनी निवासी आमिर सैफी और अलीगढ़ के गगौरी निवासी मनीष कुमार हैं। वीवी इंटरप्राइजेज नामक फर्म में मनीष मैनेजर है जबकि आमिर एडमिन। फर्म में 20 से 25 कर्मचारी थे। गिरफ्तार आरोपियों से 8 सिम बॉक्स, 221 सिम, 96 रेडियो एंटीना, पांच लैपटॉप बरामद किए गए हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सिम कार्ड जारी कराने वालों, सिम बॉक्स के माध्यम से की गई कुल कॉल की जानकारी पुलिस जुटा रही है। बरामद सिम बॉक्स चीन निर्मित हैं, इनका प्रयोग भारत में प्रतिबंधित है।
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एक ही स्थान पर आई लोकेशन
आरोपी दो तरीके से काम कर रहे थे। अपना कॉल सेंटर चला रहे थे। बिना अनुमति के सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर राजस्व की हानि भी पहुंचा रहे थे। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि उन्हें लोग कॉल कर परेशान कर रहे हैं। लोन की धनराशि मांग रहे हैं। विरोध पर गाली-गलौज और धमकी देते हैं। कानपुर सहित कई जिले के लोगों ने शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल और दूरसंचार विभाग से की थी। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच की। जिन सिम नंबर से धमकी भरी कॉल की जा रही थीं, उन सभी की लोकेशन सत्यम प्लाजा में एक ही स्थान पर आ रही थी। इससे पुलिस इन तक पहुंच सकी।
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डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी खंदारी के नसीराबाद कॉलोनी निवासी आमिर सैफी और अलीगढ़ के गगौरी निवासी मनीष कुमार हैं। वीवी इंटरप्राइजेज नामक फर्म में मनीष मैनेजर है जबकि आमिर एडमिन। फर्म में 20 से 25 कर्मचारी थे। गिरफ्तार आरोपियों से 8 सिम बॉक्स, 221 सिम, 96 रेडियो एंटीना, पांच लैपटॉप बरामद किए गए हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सिम कार्ड जारी कराने वालों, सिम बॉक्स के माध्यम से की गई कुल कॉल की जानकारी पुलिस जुटा रही है। बरामद सिम बॉक्स चीन निर्मित हैं, इनका प्रयोग भारत में प्रतिबंधित है।
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एक ही स्थान पर आई लोकेशन
आरोपी दो तरीके से काम कर रहे थे। अपना कॉल सेंटर चला रहे थे। बिना अनुमति के सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर राजस्व की हानि भी पहुंचा रहे थे। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि उन्हें लोग कॉल कर परेशान कर रहे हैं। लोन की धनराशि मांग रहे हैं। विरोध पर गाली-गलौज और धमकी देते हैं। कानपुर सहित कई जिले के लोगों ने शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल और दूरसंचार विभाग से की थी। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच की। जिन सिम नंबर से धमकी भरी कॉल की जा रही थीं, उन सभी की लोकेशन सत्यम प्लाजा में एक ही स्थान पर आ रही थी। इससे पुलिस इन तक पहुंच सकी।
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रिश्तेदारों की भी जानकारी
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि करीब छह महीने पहले फर्म खोली थी। उनके पास विभिन्न कंपनियों की ऋण वसूली के लिए कॉल करने का कार्य था। वह निजी कंपनियों से ऋण लेकर नहीं चुकाने वालों को कॉल करते थे। ब्रीच हंटर नामक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मोबाइल नंबर डालने पर सिम धारक और उनके परिजन के नंबर की जानकारी आ जाती है। उन्हें कॉल कर परेशान किया जाता है। एक नंबर को ब्लॉक करो तो दूसरे से कॉल करने लगते हैं। पुलिस से शिकायत का भी कोई फायदा नहीं होता। लोगों के सगे संबंधियों के नंबर हासिल कर ऋण नहीं चुकाने पर धमकी देते थे। पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति को चार से अधिक सिम लेने के लिए दूरसंचार विभाग से अनुमति लेनी होती है।
सॉफ्टवेयर से मोबाइल टावर तक पहुंचती थी कॉल
डीसीपी ने बताया कि दूरसंचार विभाग का विभिन्न कंपनियों से अनुबंध रहता है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी बैठकर अगर इंटरनेट के माध्यम से कॉल करता है तो टेलीकॉम कंपनी के माध्यम से आगे भेजी जाती है। इसके लिए संबंधित को हर महीने लाइसेंस फीस दूरसंचार विभाग को देनी होती है। अपनी केवाईसी भी करानी होती है। इस पर विभाग कॉलिंग की अनुमति देता है। कॉल को विभिन्न कंपनी डायवर्ट करती हैं। सिम बॉक्स से पूरे सिस्टम को बाईपास कर दिया जाता है। चीन से आयातित सिम बॉक्स में 8, 16, 32 तक सिम लग जाते हैं। सिम को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से ऑपरेट किया जाता है। कॉल किसी कंपनी और विभाग के पास भी नहीं जाती। सीधे सिम बॉक्स के माध्यम से मोबाइल टावर तक पहुंचती है। लोगों को लगता है कि कॉल करने वाले उनके देश में ही हैं जबकि वो कहीं और होते हैं। यह पूरी प्रक्रिया अवैध है। सिम बॉक्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि करीब छह महीने पहले फर्म खोली थी। उनके पास विभिन्न कंपनियों की ऋण वसूली के लिए कॉल करने का कार्य था। वह निजी कंपनियों से ऋण लेकर नहीं चुकाने वालों को कॉल करते थे। ब्रीच हंटर नामक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मोबाइल नंबर डालने पर सिम धारक और उनके परिजन के नंबर की जानकारी आ जाती है। उन्हें कॉल कर परेशान किया जाता है। एक नंबर को ब्लॉक करो तो दूसरे से कॉल करने लगते हैं। पुलिस से शिकायत का भी कोई फायदा नहीं होता। लोगों के सगे संबंधियों के नंबर हासिल कर ऋण नहीं चुकाने पर धमकी देते थे। पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति को चार से अधिक सिम लेने के लिए दूरसंचार विभाग से अनुमति लेनी होती है।
सॉफ्टवेयर से मोबाइल टावर तक पहुंचती थी कॉल
डीसीपी ने बताया कि दूरसंचार विभाग का विभिन्न कंपनियों से अनुबंध रहता है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी बैठकर अगर इंटरनेट के माध्यम से कॉल करता है तो टेलीकॉम कंपनी के माध्यम से आगे भेजी जाती है। इसके लिए संबंधित को हर महीने लाइसेंस फीस दूरसंचार विभाग को देनी होती है। अपनी केवाईसी भी करानी होती है। इस पर विभाग कॉलिंग की अनुमति देता है। कॉल को विभिन्न कंपनी डायवर्ट करती हैं। सिम बॉक्स से पूरे सिस्टम को बाईपास कर दिया जाता है। चीन से आयातित सिम बॉक्स में 8, 16, 32 तक सिम लग जाते हैं। सिम को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से ऑपरेट किया जाता है। कॉल किसी कंपनी और विभाग के पास भी नहीं जाती। सीधे सिम बॉक्स के माध्यम से मोबाइल टावर तक पहुंचती है। लोगों को लगता है कि कॉल करने वाले उनके देश में ही हैं जबकि वो कहीं और होते हैं। यह पूरी प्रक्रिया अवैध है। सिम बॉक्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।