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यूपी: कर्मचारियों पर गिरी गाज, नेताओं पर कार्रवाई नहीं! एमएलसी चुनाव में बूथ कैप्चरिंग पर एक्शन, उठे ये सवाल
Tue, 27 Oct 2026 09:26 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 27 Oct 2026 09:26 AM IST
आगरा खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन-2026 में कथित चुनावी गड़बड़ियों के बाद छह अधिकारियों के निलंबन और 21 कर्मचारियों पर कार्रवाई से राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सपा ने नेताओं पर कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है।
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एमएलसी चुनाव आगरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक व स्नातक निर्वाचन-2026 के दौरान बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आयोग के निर्देश पर 6 अधिकारियों को निलंबित करने और 21 अन्य कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार तो चला दी गई है, लेकिन इस पूरी घटना के पीछे मुख्य भूमिका निभाने वाले राजनीतिक चेहरों और नेताओं पर कोई आंच न आने से एकतरफा कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सपा के शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी डाॅ. आकाश अग्रवाल ने कई नेताओं का नाम लेकर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए। भाजपा नेता भी सपा नेताओं पर अराजकता करने के आरोप लगाते रहे। प्रशासनिक अमले ने भी आरोपों को सही मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की पर वह सरकारी कर्मियों तक ही सीमित रही। न तो पुलिस प्रशासन ने किसी नेता या कार्यकर्ता को आरोपी बनाया, न ही अभी तक कोई कार्रवाई हुई। निर्वाचन आयोग के आदेश पर सैंया और फतेहाबाद के बूथों पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों और पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली गई।
हालांकि, कनिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि मतदान केंद्रों पर बने दबाव और अराजकता फैलाने वाले असामाजिक तत्वों व नेताओं के खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से कोई कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि केवल ड्यूटी निभा रहे कर्मियों को बलि का बकरा बना दिया गया, जबकि गड़बड़ी कराने वाले मुख्य साजिशकर्ता साफ बच निकले। बता दें, कि 23 अक्तूबर को हुए मतदान में सैंया, खेरागढ़ और फतेहाबाद के बूथों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद आयोग को पुनर्मतदान कराने का फैसला लेना पड़ा।
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समाजवादी पार्टी महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने बताया कि प्यादों पर कार्रवाई कर बड़ों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बूथ कैप्चरिंग जिन लोगों ने की, उनके नाम से शिकायत की गई। फिर भी प्राथमिकी अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई। अब आयोग ने छोटे कर्मियों पर कार्रवाई की है लेकिन नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साफ दर्शाता है कि चुनावी मशीनरी और भाजपा में मिलीभगत है।
जिलाध्यक्ष भाजपा प्रशांत पौनिया ने बताया कि भाजपा अनुशासन वाली पार्टी है। चुनाव में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अराजकता की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे लोगों को फर्जी मतदान करने से रोका। बूथ कैप्चरिंग से न तो पार्टी का कोई लेना देना है, न ही पार्टी की ऐसी विचारधारा है। हम संविधान को मानने और उसका पालन करने में विश्वास रखते हैं।
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सपा के शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी डाॅ. आकाश अग्रवाल ने कई नेताओं का नाम लेकर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए। भाजपा नेता भी सपा नेताओं पर अराजकता करने के आरोप लगाते रहे। प्रशासनिक अमले ने भी आरोपों को सही मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की पर वह सरकारी कर्मियों तक ही सीमित रही। न तो पुलिस प्रशासन ने किसी नेता या कार्यकर्ता को आरोपी बनाया, न ही अभी तक कोई कार्रवाई हुई। निर्वाचन आयोग के आदेश पर सैंया और फतेहाबाद के बूथों पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों और पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली गई।
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हालांकि, कनिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि मतदान केंद्रों पर बने दबाव और अराजकता फैलाने वाले असामाजिक तत्वों व नेताओं के खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से कोई कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि केवल ड्यूटी निभा रहे कर्मियों को बलि का बकरा बना दिया गया, जबकि गड़बड़ी कराने वाले मुख्य साजिशकर्ता साफ बच निकले। बता दें, कि 23 अक्तूबर को हुए मतदान में सैंया, खेरागढ़ और फतेहाबाद के बूथों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद आयोग को पुनर्मतदान कराने का फैसला लेना पड़ा।
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समाजवादी पार्टी महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने बताया कि प्यादों पर कार्रवाई कर बड़ों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बूथ कैप्चरिंग जिन लोगों ने की, उनके नाम से शिकायत की गई। फिर भी प्राथमिकी अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई। अब आयोग ने छोटे कर्मियों पर कार्रवाई की है लेकिन नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साफ दर्शाता है कि चुनावी मशीनरी और भाजपा में मिलीभगत है।
जिलाध्यक्ष भाजपा प्रशांत पौनिया ने बताया कि भाजपा अनुशासन वाली पार्टी है। चुनाव में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अराजकता की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे लोगों को फर्जी मतदान करने से रोका। बूथ कैप्चरिंग से न तो पार्टी का कोई लेना देना है, न ही पार्टी की ऐसी विचारधारा है। हम संविधान को मानने और उसका पालन करने में विश्वास रखते हैं।