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विश्व रेबीज दिवस: कुत्ता काटे तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, तुरंत उठाएं ये कदम; वरना जा सकती है जान

Mon, 28 Sep 2026 09:23 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 28 Sep 2026 09:23 AM IST
सार
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आगरा में इस साल 27 सितंबर तक जानवरों के काटने के 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंचे, इनमें गंभीर घाव वाले 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाना पड़ा। डॉक्टरों ने कुत्ता काटने पर घरेलू इलाज से बचने, घाव को 15 मिनट साबुन-पानी से धोने और 24 घंटे के भीतर एआरवी लगवाने की सलाह दी है।
 

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World Rabies Day: Dog Bite Can Be Dangerous, Avoid These Mistakes and Take Immediate Steps
कुत्ता - फोटो : istock

विस्तार

निराश्रित कुत्ते लोगों पर हमले कर रहे हैं। इसके कारण इस साल 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाना पड़ा। इनमें कुत्तों द्वारा चेहरे और गर्दन पर काटने के घाव ज्यादा मिले हैं। चिकित्सक लोगों को सलाह दे रहे हैं कि कुत्ता काटने पर घरेलू इलाज के चक्कर में न पड़ते हुए 24 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाएं। उधर, लापरवाही बरतने पर तीन संदिग्ध मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
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नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि रेबीज जूनोटिक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से होती है। 99 फीसदी मामले कुत्ता काटने के हैं। जिले में बीते साल 1.80 लाख लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्लियों ने काटा। इस साल 27 सितंबर तक 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। इनमें से हालत गंभीर होने पर 2,661 मरीजों को सीरम देना पड़ा। 2024 में सिर्फ चार और बीते साल 411 मरीजों को सीरम लगाया गया था।

 
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निराश्रित कुत्तों ने किए ज्यादा हमले
जिला अस्पताल के एंटी रेबीज वैक्सीन ओपीडी के प्रभारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि बीते साल जानवरों के काटने के 3,619 मरीज अस्पताल में आए। इसमें से 2,390 को निराश्रित और 273 को पालतू कुत्तों ने काटकर घायल किया। 740 को बंदरों ने और 183 को बिल्ली ने काटा। बाकी चूहा, सियार आदि जानवरों के काटे हुए मरीज थे।

 
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इन बातों का रखें ध्यान
घाव को साबुन से नल के नीचे लगाकर 15 मिनट तक धोएं।
घाव पर एंटी सेप्टिक ऑइंटमेंट लगाएं, तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
24 घंटे में जाकर एआरवी लगवाएं। पूरी डोज लगवाएं।

 

रेबीज के लक्षण इस प्रकार हैं-
इसके शुरुआती लक्षण सामान्य होते हैं मगर धीरे-धीरे यह खतरनाक रूप लेता जाता है। सही समय पर इसका उपचार बहुत जरूरी हो जाता है।
जी मचलना
मन में बहुत ज्यादा घबराहट रहना
बुखार का आना
सिरदर्द रहना
चिंता का रहना
उलझन में मन रहना
अशांत मन का रहना
अनिंद्रा
हाइड्रोफोबिया
मुंह से अत्यधिक लार का गिरना
बात-बात पर गुस्सा करना।
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