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एएमयू: पुलिस की 14 दिवसीय रिमांड अर्जी खारिज, आरोपी छात्र शहजिल की गिरफ्तारी अवैध करार, मुचलके पर रिहा

Sun, 13 Sep 2026 11:25 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 13 Sep 2026 11:25 AM IST
सार
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इस केस में वादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को बहला-फुसलाकर एएमयू स्थित विकारुल मुल्क (वीएम) हॉल के कमरे में बुलाया गया। बंधक बनाकर मारपीट की गई और अश्लील वीडियो के जरिये ब्लैकमेल कर रुपये वसूले गए।

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Accused AMU student Shahzil released on bail
आरोपी शहजिल शान खान - फोटो : एआई व पुलिस

विस्तार

ब्लैकमेलिंग के आरोपी एएमयू के बीबीए छात्र शहजिल शान खान के खिलाफ थाना सिविल लाइन में शुक्रवार को दर्ज एफआईआर के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रभारी) की अदालत ने आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। पुलिस के 14 दिवसीय रिमांड के आवेदन को भी खारिज कर दिया। अदालत ने आरोपी को 25,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया है।

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इस केस में वादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को बहला-फुसलाकर एएमयू स्थित विकारुल मुल्क (वीएम) हॉल के कमरे में बुलाया गया। बंधक बनाकर मारपीट की गई और अश्लील वीडियो के जरिये ब्लैकमेल कर रुपये वसूले गए। सुनवाई में अदालत ने पाया कि घटना 17 अगस्त 2026 की थी जबकि इसकी एफआईआर बिना किसी स्पष्टीकरण के 25 दिन बाद यानी 11 सितंबर 2026 को दर्ज कराई गई। केस डायरी से यह भी पता चला कि वादी का बेटा समलैंगिक डेटिंग एप के माध्यम से संपर्क में आया था और स्वेच्छा से मिलने गया था। अदालत का मानना था कि इन परिस्थितियों में पहली नजर में गंभीर धाराएं इस मामले में पूरी तरह सटीक नहीं बैठती हैं।
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शुक्रवार को सिविल लाइन थाने में केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने शहजिल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। शनिवार को उसे मुचलके पर रिहाई मिल चुकी है लेकिन बन्ना देवी थाने में नई एफआईआर से उसकी कानूनी मुश्किलें अभी बनी हुई हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का दिया हवाला
अदालत ने सन 2014 के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य और सत्येन्द्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई (2022) के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट का यह दायित्व है कि वह अभियुक्त की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करे। अदालत ने पुलिस विवेचक का रिमांड प्रार्थना पत्र अस्वीकार करते हुए आरोपी को विवेचना में सहयोग करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने की शर्तों के तहत रिहा कर दिया।

थाना सिविल लाइन में दर्ज केस में मुख्य आरोपी को अदालत से राहत मिली है। वादी की तरफ से जो आरोप लगाए गए हैं उनमें सात वर्ष से कम सजा का प्रावधान है। इसी आधार पर उसे राहत मिली है लेकिन केस अपनी जगह कायम है। पुलिस जांच कर रही है और अन्य आरोपों के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। - सर्वम सिंह, सीओ तृतीय

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