{"_id":"6a8978c1be335540a9060ad1","slug":"orders-student-reinstatement-in-class-10-following-verification-of-medical-certificate-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : चिकित्सा प्रमाणपत्र की जांच के बाद 10वीं में छात्र की बहाली का आदेश, नवोदय विद्यालय का आदेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : चिकित्सा प्रमाणपत्र की जांच के बाद 10वीं में छात्र की बहाली का आदेश, नवोदय विद्यालय का आदेश रद्द
Sat, 22 Aug 2026 03:54 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 22 Aug 2026 03:54 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम हाजिरी के आधार पर 10वीं के छात्र को दोबारा प्रवेश नहीं देने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय बुलंदशहर के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही प्रधानाचार्य को छात्र के चिकित्सा प्रमाणपत्र की जांच करने व उसमें सही पाने पर दोबारा प्रवेश देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम हाजिरी के आधार पर 10वीं के छात्र को दोबारा प्रवेश नहीं देने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय बुलंदशहर के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही प्रधानाचार्य को छात्र के चिकित्सा प्रमाणपत्र की जांच करने व उसमें सही पाने पर दोबारा प्रवेश देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने छात्र विजय कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याची ने कोर्ट से नियमित छात्र के रूप में प्रवेश बहाल करने व कक्षा नौ की छूटी परीक्षाओं को विशेष या सप्लीमेंट्री परीक्षा के माध्यम से पूरा करने की अनुमति मांगी थी। याची ने दलील दी कि उसने कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई पूरी की है। उसका अनुशासन रिकॉर्ड भी अच्छा रहा। इसी दौरान वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हो गया।
विज्ञापन
नाक में गंभीर अवरोध, एलर्जिक राइनाइटिस, साइनसाइटिस और लगातार कब्ज जैसी समस्याओं के कारण उसे लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। एनसीआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में लंबे समय तक भर्ती रहा। इसके अलावा नई दिल्ली के उसका एम्स में भी उपचार हुआ। उसके अभिभावक लगातार विद्यालय को बीमारी और अनुपस्थिति की जानकारी देते रहे। अवकाश प्रार्थना पत्र भी दिए गए।
विज्ञापन
20 फरवरी को विद्यालय लौटने पर उसे कम उपस्थिति के आधार पर प्रवेश नहीं दिया गया। उसकी उपस्थिति केवल सात फीसदी बताई गई थी। विद्यालय ने एनवीएस के नौ अक्तूबर 2025 के दिशानिर्देश का हवाला दिया, जिसके अनुसार 40 फीसदी से कम उपस्थिति को माफ नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने मामला प्रधानाचार्य को वापस भेजते हुए आदेश दिया कि संबंधित अस्पतालों से मेडिकल रिकॉर्ड की सत्यता और प्रमाणिकता की जांच की जाए। यदि मेडिकल रिकॉर्ड सही पाए जाते हैं और यह साबित होता है कि छात्र की अनुपस्थिति इलाज के कारण हुई थी तो चार सप्ताह के भीतर उसे कक्षा 10 के नियमित छात्र के रूप में दोबारा प्रवेश दिया जाए। साथ ही नियमानुसार उसे कक्षा नौ की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए विशेष या सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए।