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हाईकोर्ट : उपाध्याय समुदाय पर टिप्पणी के मामले में रामभद्राचार्य को राहत, एफआईआर की मांग वाली याचिका खारिज
Sun, 06 Sep 2026 04:51 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 06 Sep 2026 04:51 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपाध्याय समुदाय और शंकराचार्यों के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
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कथावाचक रामभद्राचार्य।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपाध्याय समुदाय और शंकराचार्यों के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज न होने की शिकायत लेकर सीधे अनुच्छेद-226 के तहत हाईकोर्ट आने से पहले याचिकाकर्ता को बीएनएसएस में उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने चाहिए थे।
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एफआईआर दर्ज न होने की स्थिति में बीएनएसएस की धारा-173(4) और 175(3) के तहत संबंधित अधिकारियों और मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत का प्रभावी उपाय उपलब्ध है। मजिस्ट्रेट के समक्ष जाना केवल वैकल्पिक उपाय नहीं, बल्कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने से पहले अपनाया जाने वाला प्राथमिक कानूनी उपाय है। वाराणसी निवासी याचिकाकर्ता रमेश उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और शंकराचार्यों को फर्जी बताया। इससे समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
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संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया व यूट्यूब पर प्रसारित किए गए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने आठ अक्तूबर 2025 को वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज की मांग की थी पर कार्रवाई नहीं की गई। राज्य सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता ने संबंधित पुलिस थाने से संपर्क नहीं किया और न ही बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद-226 के तहत उसका अधिकार क्षेत्र व्यापक होने के बावजूद विवेकाधीन है। उपलब्ध वैकल्पिक प्रभावी उपाय को अपनाए बिना सीधे हाईकोर्ट आने से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया दरकिनार होगी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता को कानून के तहत उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।
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