यूसीसी: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- समान नागरिक संहिता शरीयत में दखल, इसलिए मुसलमानों को मंजूर नहीं
यूसीसी को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। इस बीच बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का मानना है कि यूसीसी शरीयत में दखल करने वाला कानून है, इसलिए इसको लागू न किया जाए।
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के साथ ही सभी समुदाय को धार्मिक आजादी दी गई है। अगर समान नागरिक संहिता द्वारा धार्मिक आजादी को छीनने की कोशिश होगी, तो ये देश हित में नहीं होगा। भारत के 30 करोड़ मुसलमानों का मानना है कि यूसीसी शरीयत में मुदाखलत (हस्तक्षेप) करता हुआ कानून है, इसलिए इसको लागू न किया जाए। अगर लागू किया जाता है, तो इस पर अमल करने के लिए मुसलमानों को मजबूर न किया जाए।
मौलाना ने तमाम मुस्लिम संगठनों से अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में धरना प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है। मगर इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक ना हो , प्रदर्शनकारियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विरोध प्रदर्शन अमन व शांति के साथ किया जाए। किसी तरह भी उपद्रव न हो और हर काम कानून के दायरे में रहकर किया जाए।
हर समुदाय के व्यक्ति से ली जाए राय- मौलाना
मौलाना ने कहा कि यूसीसी को लागू करने के लिए संविधान ने कुछ शर्तें रखी हैं। उसमें खास बात ये कही गई है कि जिस राज्य में ये कानून लागू किया जाएगा, वहां रहने वाले हर समुदाय व हर संप्रदाय के व्यक्तियों की राय ली जाएगी। अगर सभी नागरिक यूसीसी बनाने पर सहमत हैं, तो राज्य में कानून लागू किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
मौलाना ने कहा कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट जिन जिन राज्यों में बनाया जा रहा है, वो सिर्फ एक ही राज्य का मॉडल है। जबकि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मुद्दे हैं। अलग-अलग धर्मों के मानने वालों की जनसंख्या है। इसलिए एक राज्य का मॉडल सभी राज्यों पर लागू नहीं किया जा सकता।
'नार्थ ईस्ट के राज्यों में आएगी चुनौती'
मौलाना ने कहा कि यूसीसी को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या नार्थ ईस्ट के राज्यों में आएगी, क्योंकि नगालैंड में नगा समुदाय, मिज़ोरम में मिज़ोरम समुदाय और दूसरे जन जाति समुदाय को यूसीसी के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इन राज्यों में अपने अलग-अलग कानून ढांचे वर्षों से स्थापित हैं और इनको संविधान भी संरक्षण देता है। इसलिए इनसे छेड़छाड़ करना अच्छा नहीं होगा।