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बरेली: योगी सरकार के मंत्री को राज्यसभा का टिकट, यूपी चुनाव से पहले भाजपा ने खेला चौंकाने वाला दांव

Mon, 05 Oct 2026 05:42 PM IST
Mukesh Kumar अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 05 Oct 2026 05:42 PM IST
सार
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भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए योगी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। यह फैसला यूपी चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। धर्मपाल सिंह लोधी समाज के प्रमुख भाजपा चेहरों में शुमार हैं। 

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Yogi government minister Dharampal Singh gets Rajya Sabha ticket by BJP in Bareilly
कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में आठ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें बरेली के आंवला से पांच बार के विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह भी शामिल हैं। 16 अक्तूबर को प्रस्तावित चुनाव के लिए भाजपा ने इस बार कई नए चेहरों के साथ संगठन और सरकार में सक्रिय नेताओं को भी मौका दिया है। धर्मपाल सिंह को मंत्री पद पर रहते राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने से बरेली-रुहेलखंड की राजनीति में इसके निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं।

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धर्मपाल सिंह मौजूदा योगी सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास, राजनीतिक पेंशन, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज तथा नागरिक सुरक्षा विभाग संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका राज्यसभा प्रत्याशी बनाया जाना सिर्फ विधानसभा से उच्च सदन की ओर बदलाव नहीं, बल्कि लंबे प्रशासनिक और विधायी अनुभव वाले नेता को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका देने के फैसले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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मंत्री रहते राज्यसभा का टिकट, क्यों?
भाजपा ने धर्मपाल सिंह के चयन की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर इसके कई संभावित पहलू हैं। 

पहला, लंबा विधायकी अनुभव: धर्मपाल सिंह करीब तीन दशक से विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं और आंवला से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। 1996 में पहली बार विधायक बनने के बाद 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2012 से 2017 तक वह भाजपा विधानमंडल दल के उपनेता भी रहे।

दूसरा, लोधी समाज में राजनीतिक पकड़: बरेली और आसपास के क्षेत्रों में धर्मपाल सिंह को भाजपा के प्रमुख लोधी चेहरों में गिना जाता है। 2022 में उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने के समय भी उनकी लगातार चुनावी जीत, संगठन से लंबे जुड़ाव और सामाजिक आधार को महत्वपूर्ण माना गया था।

तीसरा, प्रदेश की राजनीति से राष्ट्रीय भूमिका की ओर बढ़ना: पांच बार विधायक और कई सरकारों में मंत्री रहे धर्मपाल सिंह का अनुभव अब राज्यसभा के जरिये राष्ट्रीय राजनीति में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसे पार्टी की घोषित रणनीति के बजाय राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर संभावित कारण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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ब्लॉक प्रमुख से मंत्री और अब राज्यसभा का टिकट 
धर्मपाल सिंह का राजनीतिक सफर 1988 में मझगवां के ब्लॉक प्रमुख से शुरू हुआ। 1993 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके तीन साल बाद 1996 में आंवला से पहली बार विधायक बने।

साल 1997 में उन्हें मायावती सरकार में लोक निर्माण एवं पर्यटन राज्यमंत्री बनाया गया। इसी साल कल्याण सिंह सरकार में पंचायती राज एवं श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी मिली। 2002 में दूसरी बार विधायक बने और श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे।

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साल 2007 में आंवला सीट बसपा के खाते में जाने के बाद 2012 में धर्मपाल सिंह ने फिर वापसी की। इस कार्यकाल में वह भाजपा विधानमंडल दल के उपनेता रहे। 2017 में चौथी बार विधायक बनने पर योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में सिंचाई एवं सिंचाई यांत्रिकी मंत्री बने। 2022 में पांचवीं बार जीत के बाद उन्हें योगी सरकार में फिर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

आंवला से पांच बार जीते 
धर्मपाल सिंह की राजनीतिक ताकत का बड़ा आधार आंवला विधानसभा क्षेत्र रहा है। 1996 में पहली जीत के बाद 2002 में भी वह विधायक बने। 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2012 में उन्होंने वापसी की और इसके बाद 2017 तथा 2022 में भी सीट बरकरार रखी।

2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 88,956 वोट मिले और उन्होंने करीब 18 हजार वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इससे आंवला में उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आधार और संगठनात्मक पकड़ का अंदाजा मिलता है।

लोधी समाज के प्रमुख भाजपा चेहरों में शुमार
धर्मपाल सिंह की राजनीति में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्हें बरेली मंडल में लोधी समाज के प्रमुख भाजपा नेताओं में माना जाता है। यही वजह है कि राज्यसभा की मौजूदा सूची में उनका चयन केवल बरेली जिले तक सीमित राजनीतिक संदेश के बजाय व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

भाजपा की घोषित सूची में ओबीसी, दलित, महिला और सामान्य वर्ग से जुड़े अलग-अलग सामाजिक आधार वाले चेहरों को जगह मिली है। धर्मपाल सिंह का चयन इसी व्यापक सामाजिक संतुलन का एक हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को आधिकारिक कारण के रूप में नहीं बताया है।

2027 से पहले संगठन के लिए भी संदेश
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय धर्मपाल सिंह जैसे लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय नेता को राज्यसभा प्रत्याशी बनाना संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।

राज्यसभा भेजे जाने की स्थिति में आंवला में पार्टी को नया चेहरा तलाशना होगा। इसके साथ ही धर्मपाल सिंह का अनुभव विधानसभा क्षेत्र तक सीमित न रहकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के काम आ सकता है। इसे 2027 की सीधी चुनावी रणनीति कहना अभी उचित नहीं होगा, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उनका उच्च सदन के लिए चयन भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों में बदलाव का संकेत जरूर देता है।

मंत्री पद का क्या होगा?
राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होते ही धर्मपाल सिंह का कैबिनेट मंत्री पद समाप्त नहीं होता। अभी वह राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार हैं। नामांकन, चुनाव और निर्वाचन के बाद ही उनकी आगे की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होगी।

भाजपा ने मौजूदा कैबिनेट मंत्री और पांच बार के विधायक को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनके निर्वाचित होने की स्थिति में आगे मंत्रिमंडल में बदलाव या विभागीय पुनर्व्यवस्था का फैसला पार्टी और सरकार को करना होगा।

बरेली को एक साथ दो राज्यसभा चेहरे
भाजपा ने इस बार बरेली से जुड़े दो अलग राजनीतिक चेहरों को राज्यसभा के लिए चुना है। श्रुति गंगवार की पहचान उद्यमिता, बैंकिंग और सामाजिक गतिविधियों के साथ संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी है, जबकि धर्मपाल सिंह की पहचान लंबी चुनावी राजनीति, मंत्री पद और लोधी समाज के प्रमुख भाजपा चेहरे के रूप में रही है।

यानी एक ही सूची में बरेली को नई पीढ़ी की महिला और उद्यमी चेहरे के साथ लंबे जमीनी राजनीतिक अनुभव वाले नेता का प्रतिनिधित्व मिला है। रूहेलखंड की राजनीति के लिहाज से यह भाजपा के लिए दो अलग सामाजिक और राजनीतिक आधारों को उच्च सदन तक पहुंचाने वाला फैसला है।

धर्मपाल सिंह : राजनीतिक सफर
  • 1988 - मझगवां ब्लॉक प्रमुख बने
  • 1993 - भाजपा के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, हार
  • 1996 - पहली बार आंवला विधायक
  • 1997 - मायावती सरकार में राज्यमंत्री; बाद में कल्याण सिंह सरकार में पंचायती राज एवं श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार
  • 2002 - दूसरी बार विधायक; श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार
  • 2007 - आंवला से चुनाव हारे
  • 2012 - तीसरी बार विधायक; भाजपा विधानमंडल दल के उपनेता
  • 2017 - चौथी बार विधायक; योगी सरकार में सिंचाई मंत्री
  • 2022 - पांचवीं बार आंवला विधायक; योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री
  • 2026 - भाजपा ने राज्यसभा प्रत्याशी बनाया
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