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129 पदों की भर्ती में अनियमितता: यूपीसीडा के 18 साल पुराने भर्ती घोटाले में तीन सेवानिवृत्त अफसरों पर एफआईआर

Thu, 08 Oct 2026 10:02 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Thu, 08 Oct 2026 10:02 PM IST
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FIR against three retired officers in 18-year-old UPSIDA recruitment scam
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बसपा शासनकाल में वर्ष 2008-09 में हुई यूपीसीडा (तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम) की भर्ती में कथित घोटाले का मामला करीब 18 साल बाद फिर खुल गया है। विजिलेंस की जांच में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप सही पाए जाने के बाद शासन के निर्देश पर तीन तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों में सेवानिवृत्त हो चुके अधीक्षण अभियंता/प्रबंधक (कार्मिक) व ओएसडी अजीत सिंह, संयुक्त प्रबंध निदेशक तपेंद्र प्रसाद और सहायक प्रबंधक (कार्मिक) सुधीर कनौजिया शामिल हैं।
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बसपा शासनकाल में बैकलॉग के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे। उस समय संस्था यूपीसीडा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के नाम से संचालित थी। आरोप है कि स्वीकृत 129 पदों के सापेक्ष नियमों को दरकिनार कर 19 अतिरिक्त नियुक्तियां कर दी गईं। इसके अलावा 17 अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी दी गई। क्रीमी लेयर में आने वाले करीब आधा दर्जन अभ्यर्थियों को भी आरक्षण का लाभ दिए जाने का आरोप है। भर्ती प्रक्रिया में मानचित्रकार, आशुलिपिक (टंकण), उप प्रबंधक (लेखा), उप प्रबंधक (सामान्य) और सहायक प्रबंधक (लेखा) समेत विभिन्न पदों पर नियमों की अनदेखी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं।
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2012 में सामने आया था मामला
भर्ती घोटाला वर्ष 2012 में सामने आया था। इसके बाद मामले की जांच कई बार शुरू हुई और बंद होती रही। अब शासन के निर्देश पर कानपुर विजिलेंस ने जांच आगे बढ़ाई है। विजिलेंस टीम भर्ती से जुड़े अभिलेखों और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। एसपी विजिलेंस वैभव पांडेय ने बताया कि जांच में आरोप सही पाए गए हैं। एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। आरोपी वर्तमान में कहां हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
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