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केन फिर उफनाई: किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा, सहायक नदियां और नाले भी उफान पर
Sun, 23 Aug 2026 07:53 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: Shikha Pandey
Updated Sun, 23 Aug 2026 07:53 PM IST
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रपटे पर चल रही नाव
- फोटो : अमर उजाला
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केन नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। शनिवार रात जलस्तर में कमी आने के बाद रविवार को फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है। प्रशासन भी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए है। हालांकि, अभी केन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब साढ़े चार मीटर नीचे है।
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केन नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को 98.53 मीटर दर्ज किया गया था। शुक्रवार को घटकर 98.41 मीटर पहुंच गया। शनिवार को फिर जलस्तर बढ़ा और दोपहर तक 98.55 मीटर दर्ज किया गया। रात में इसमें कुछ कमी आई लेकिन रविवार को जलस्तर फिर 98.41 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से करीब साढ़े चार मीटर नीचे है। इसके बावजूद आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों और नदी किनारे के खेतों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। पडो़हरा नांदादेव संपर्क मार्ग पर बने रपटे पर नाव चल रही हैं। प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।
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यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव
यमुना नदी का जलस्तर भी लगातार बदल रहा है। शनिवार को यमुना का जलस्तर 91.20 मीटर दर्ज किया गया था। रविवार को इसमें मामूली कमी आई और जलस्तर 91.08 मीटर दर्ज किया गया। फिलहाल यमुना में भी जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे है, लेकिन केन और यमुना दोनों नदियों में पानी के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाढ़ की आशंका पूरी तरह टली नहीं है।
यमुना नदी का जलस्तर भी लगातार बदल रहा है। शनिवार को यमुना का जलस्तर 91.20 मीटर दर्ज किया गया था। रविवार को इसमें मामूली कमी आई और जलस्तर 91.08 मीटर दर्ज किया गया। फिलहाल यमुना में भी जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे है, लेकिन केन और यमुना दोनों नदियों में पानी के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाढ़ की आशंका पूरी तरह टली नहीं है।
चंद्रावल नदी की बाढ़ में गौरी-अमारा मार्ग का मंदिर डूबा, फसलों पर मंडराया संकट
केन और यमुना नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद अब चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौरी-अमारा संपर्क मार्ग पर बना मंदिर बाढ़ के पानी में डूब गया है। वहीं, नदी किनारे खेतों में बोई तिल, बाजरा, ज्वार और अरहर की फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। फसल डूबने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
चंद्रावल नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे के खेतों तक पानी पहुंचने लगा है। किसानों को तिल, ज्वार, बाजरा और अरहर की फसल खराब होने का डर सता रहा है। तहसील प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए राजस्व कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल लगातार चंद्रावल नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन किसानों की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है, मौके पर पहुंचकर उसका निरीक्षण करें और शासन की गाइडलाइन के अनुसार रिपोर्ट भेजें। उन्होंने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए वालंटियर्स की तैनाती की गई है। नाविकों को लाइफ जैकेट पहनकर ही नाव संचालन करने और ग्रामीणों को सीमित संख्या में सुरक्षित आवागमन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
केन और यमुना नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद अब चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौरी-अमारा संपर्क मार्ग पर बना मंदिर बाढ़ के पानी में डूब गया है। वहीं, नदी किनारे खेतों में बोई तिल, बाजरा, ज्वार और अरहर की फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। फसल डूबने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
चंद्रावल नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे के खेतों तक पानी पहुंचने लगा है। किसानों को तिल, ज्वार, बाजरा और अरहर की फसल खराब होने का डर सता रहा है। तहसील प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए राजस्व कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल लगातार चंद्रावल नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन किसानों की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है, मौके पर पहुंचकर उसका निरीक्षण करें और शासन की गाइडलाइन के अनुसार रिपोर्ट भेजें। उन्होंने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए वालंटियर्स की तैनाती की गई है। नाविकों को लाइफ जैकेट पहनकर ही नाव संचालन करने और ग्रामीणों को सीमित संख्या में सुरक्षित आवागमन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
तुर्री नाला रपटा फिर खुला
तहसीलदार ने बताया कि शनिवार को सिंधनकला-तुर्री नाला रपटा पर करीब एक फीट पानी आ जाने से आवागमन बंद करा दिया गया था। इस दौरान ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव का संचालन कराया गया। रविवार को पानी कम होने पर रपटा खुल गया और आवागमन फिर से बहाल कर दिया गया।
तहसीलदार ने बताया कि शनिवार को सिंधनकला-तुर्री नाला रपटा पर करीब एक फीट पानी आ जाने से आवागमन बंद करा दिया गया था। इस दौरान ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव का संचालन कराया गया। रविवार को पानी कम होने पर रपटा खुल गया और आवागमन फिर से बहाल कर दिया गया।