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साइबर ठगी का भंडाफोड़: देशभर के 143 लोगों से 116.86 करोड़ की ठगी में सरगना समेत चार गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

Sun, 23 Aug 2026 06:27 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 23 Aug 2026 06:27 PM IST
सार
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वाराणसी पुलिस ने देशभर में फैले साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा कर सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह से जुड़े 41 बैंक खातों में 116.86 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं। आरोपी ‘एक्सपे एप’ से मोबाइल संदेश हासिल कर बैंक के एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड चुराते थे। 143 शिकायतें भी दर्ज मिली हैं।

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Fraud Expe app 116 crore cyber scam busted four arrested including mastermind 143 complaints registered
गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी देती पुलिस। - फोटो : संवाद

विस्तार

फर्जी फर्म, गेमिंग और बेटिंग एप के जरिये खाते खुलवाकर और कमीशन का लालच देकर देश भर के 143 लोगों से 116.86 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई। अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के सरगना नीतीश कुमार पांडेय समेत चार आरोपियों को साइबर क्राइम सेल और चेतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार को गिरफ्तार किया।

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आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 40 डेबिट कार्ड, दो क्रेडिट कार्ड, चार शॉपिंग कार्ड, एक ग्रीन रेमिट कार्ड, एक गेमिंग कार्ड, 19 चेकबुक, छह पासबुक और 48 क्यूआर कोड स्कैनर बरामद हुए हैं। एक बुलेट और एक स्कोडा रैपिड कार भी जब्त की गई है।
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एसीपी साइबर क्राइम विनय द्विवेदी ने पुलिस लाइन सभागार में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना मूलरूप से बिहार के रोहतास निवासी नीतीश कुमार पांडेय है, जो वर्तमान में चितईपुर थाना क्षेत्र के करौंदी स्थित विवेकानंदपुरम कॉलोनी के आदित्य रेजिडेंसी में रहता है। अन्य आरोपियों में दुर्गाकुंड के कबीर नगर निवासी दुष्यंत सिंह, सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा-छित्तूपुर निवासी हिमांशु झा और भेलूपुर थाना क्षेत्र के शिवाला निवासी मो. रेहान शामिल हैं।
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दो अन्य वांछित आरोपियों में सामनेघाट निवासी प्रतीक तिवारी उर्फ बंटी और रोमिल वर्मा की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।पुलिस की छानबीन में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों के 41 बैंक खातों से संबंधित कुल 143 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज हैं।

इन शिकायतों में 116 करोड़ 86 लाख 58 हजार 321 रुपये की धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। गिरोह के सदस्य लोगों को कमीशन का लालच देते थे। इसके बाद उनके नाम से फर्जी फर्म, चालू और बचत खाते खुलवाते थे। बैंक किट, इंटरनेट बैंकिंग विवरण और मोबाइल नंबर भी प्राप्त कर लेते थे।

दुष्यंत पर हरियाणा में भी दर्ज है प्राथमिकी
साइबर क्राइम सेल प्रभारी मनोज तिवारी ने बताया कि इस गिरोह में शामिल प्रतीक तिवारी उर्फ बंटी, रोमिल वर्मा समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में दुर्गाकुंड निवासी दुष्यंत सिंह के खिलाफ हरियाणा और वाराणसी के भेलूपुर थाने में साइबर ठगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज है। सरगना नीतीश पांडेय समेत अन्य आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। 

बीसीए, एमसीए कर चुके हैं आरोपी, 2021 से साइबर ठगी को दे रहे अंजाम
गिरफ्तार आरोपियों में नीतीश पांडेय, दुष्यंत, हिमांशु समेत अन्य आरोपी कंप्यूटर कोर्स कर चुके हैं। कुछ ने बीसीए और एमसीए की डिग्री भी ली है। चितईपुर से ही आरोपी पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। छानबीन में सामने आया कि वे 2021-22 से ही साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। आरोपियों के व्हाट्सएप चैट, लैपटॉप और मोबाइल की सीडीआर भी खंगाली जा रही है। आशंका है कि इस नेटवर्क के तार दुबई से जुड़े हुए हैं। देश भर में साइबर ठगी करने वाले इस गिरोह के संपर्क निजी बैंकों के कर्मियों से भी होने की आशंका है। जानबूझकर साइबर ठगी को बढ़ावा देने वाले बैंक कर्मियों की भूमिका का भी सत्यापन किया जा रहा है।

कंबोडिया, दुबई और चीन से गिरोह के संचालन की आशंका
साइबर क्राइम सेल के अनुसार, साइबर ठग कमीशन का लालच देकर लोगों के नाम पर फर्जी फर्म बनवाते थे। इसके बाद वे इन फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी (बेटिंग) और गेमिंग एप के जरिये अवैध धन के लेन-देन और ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। साइबर ठग बेरोजगार या लालच में फंसे लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफा और कमीशन का झांसा देते थे। इन खातों को चीन, कंबोडिया, दुबई समेत अन्य देशों से संचालित होने वाले सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग एप से जोड़ दिया जाता था। ठगी गई रकम को इन खातों में मंगाया जाता था और तुरंत अलग-अलग चैनलों के माध्यम से निकाल लिया जाता था।

शिकायत कहां और कैसे करें
साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। अपनी शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं। ठगी के शुरुआती एक-दो घंटे के भीतर शिकायत करने पर पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।

खुद को कैसे बचाएं

  • किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के लेन-देन के लिए कभी भी अपना बैंक खाता या यूपीआई आईडी शेयर न करें।
  • आसानी से कमीशन कमाने वाली किसी भी स्कीम के झांसे में न आएं।
  • दोस्तों, छात्रों और बेरोजगार युवाओं को जागरूक करें, क्योंकि अक्सर उन्हें ही निशाना बनाया जाता है।
  • आपका बैंक खाता आपकी वित्तीय पहचान है। इसका गलत इस्तेमाल आपकी बचत खत्म कर सकता है, आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब कर सकता है और कानूनी कार्रवाई की स्थिति में आपको जेल भी पहुंचा सकता है।
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