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द्वारढका अब देवकुंज: छोड़ी पुरानी पहचान...नई उम्मीदों के साथ नया नाम, ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से अपनाया

Tue, 13 Oct 2026 12:19 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Published by: Heera Updated Tue, 13 Oct 2026 12:19 PM IST
सार
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पलायन की मार झेल रहे गरुड़ विकासखंड के जिजोली गांव के द्वारढका तोक का नाम बदलकर देवकुंज बाखली रखा गया। वीरान होने की कगार पर पहुंचे इस तोक की पुरानी नकारात्मक पहचान को पीछे छोड़ने के लिए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। 

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Dwardhaka Tok will now be called Devkunj in garur bageshwra
गरुड़ में देवकुंज तोक का शुभारंभ करते ग्रामीण - फोटो : ग्रामीण

विस्तार

पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन के दौर के बीच गरुड़ विकासखंड के जिजोली गांव से एक बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। वीरान होने की कगार पर पहुंचे और पलायन की मार झेल रहे द्वारढका तोक ने अब अपनी पुरानी और नकारात्मक पहचान को पीछे छोड़ दिया है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस तोक का नया नाम देवकुंज बाखली रख दिया है जिसका विधिवत शुभारंभ सोमवार को पारंपरिक पूजा-पाठ और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया।

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स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार द्वारढका नाम कहीं न कहीं क्षेत्र से हो रहे पलायन, उदासी और संघर्ष की कहानी बयां करता था। ग्रामीण गोविंद जोशी ने बताया कि इस तोक में वर्तमान में करीब 10 परिवार निवास करते हैं। पूर्व में कम आबादी और रोजगार के घोर अभाव के चलते यहां के अधिकांश लोगों ने दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की ओर रुख किया था। कोरोना काल और लॉकडाउन के बाद क्षेत्र के कई युवाओं ने गांव वापसी का रुख किया और अपने पैतृक गांव में रहकर ही स्वरोजगार के जरिए आजीविका की नई राहें गढ़ीं।

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युवाओं की इस वापसी और क्षेत्र में लौटती रौनक को एक सकारात्मक पहचान देने के लिए तोक का नाम बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। श्यामखेत आश्रम के स्वामी शंकरानँछ गिरी महाराज ने इसे नया नाम देवकुंज बाखली प्रदान किया जिसे ग्रामीणों ने पूरी एकजुटता के साथ स्वीकार किया। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान पंडित चंद्रशेखर कांडपाल ने विधिवत पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नए नाम का शुभारंभ कराया। इस मौके पर अधिवक्ता डीके जोशी, ग्राम प्रधान जिजोली कलावती देवी, बीडीसी सदस्य प्रेमा जोशी, पूर्व ग्राम प्रधान भोला दत्त पांडे, ऋतुराज जोशी, आनंद सिंह दोसाद, भवानी देवी जोशी, दिनेश भट्ट, प्रकाश भट्ट, दीप भट्ट, दुर्गा देवी आदि रहीं। 

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