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Champawat News: रोजी-रोटी और शिक्षा की जंग... रोजाना कैलाश नदी ले रही इम्तिहान

Sat, 22 Aug 2026 01:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Sat, 22 Aug 2026 01:30 AM IST
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The battle for livelihood and education... the Kailash River tests them every day.
सितारगंज के पूर्वी उकरौली गांव में जान जोखिम में डालकर कैलाश नदी पार करते ग्रामीण
सितारगंज। पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया का नारा सितारगंज विकासखंड के गांव पूर्वी उकरौली पहुंचते ही कैलाश नदी के उफनाते पानी में गोते लगाते नजर आते हैं। विकास के दावों के बीच यहां के लोगों को मानसून के दौरान रोजी-रोटी और शिक्षा के लिए रोजाना नदी के तेज बहाव से जंग लड़नी पड़ती है। जोखिम उठाकर विद्यार्थी और ग्रामीण नदी पार करने को मजबूर हैं।
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रनसाली रेंज के जंगल से सटे इस गांव के एक ओर कैलाश तो दूसरी ओर नंधौर नदी बहती है। तेज बारिश के दौरान दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से करीब डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर बसा यह गांव अलग-थलग पड़ जाता है। गांव में करीब 52 परिवार रहते हैं। 100 से अधिक बच्चे पढ़ाई के लिए प्रतिदिन गांव से बाहर स्थित विद्यालयों में जाते हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही उनकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो जाता है। कई बार बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए नदी के तेज बहाव और कमर तक पानी के बीच से गुजरना पड़ता है, तो कभी ट्रैक्टर के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। अगर गांव का कोई व्यक्ति अचानक बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ जाए तो हालात अधिक गंभीर हो जाते हैं।
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बरसात में नदी में पानी बहुत बढ़ जाता है। कई बार स्कूल जाने के लिए घंटों ट्रैक्टर का इंतजार करना पड़ता है। सुविधा नहीं मिलने पर नदी तट से वापस घर लौट जाते हैं।
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-निशा कुमारी, छात्रा कक्षा 12
नदी का बहाव तेज होने पर बहुत डर लगता है। कई बार माता-पिता भी स्कूल भेजने से डरते हैं। ट्यूशन जाना भी मुश्किल हो जाता है।
-प्रिया, छात्रा, कक्षा आठ
पानी का बहाव इतना तेज होता है कि हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। रोज घर से निकलते समय परिवार को चिंता रहती है कि सुरक्षित वापस लौट पाएंगे या नहीं।
-कुलदीप कुमार, ग्रामीण
विकास की बातें बहुत होती हैं, लेकिन हमारा रास्ता आज भी नदी के भरोसे है। एक सुरक्षित पुल या स्थायी मार्ग बन जाए तो 52 परिवारों की जिंदगी बदल सकती है।
-रामेश्वर सिंह, ग्रामीण

भौगोलिक स्थिति के कारण मानसून के दौरान बच्चों की पढ़ाई और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं। लोगों को जरूरी कार्य के लिए जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ती है। गांव के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बेहद जरूरी है। इस संबंध में संबंधित विभागों और प्रशासन के समक्ष समस्या रखी जाएगी।
- उषा देवी, ग्राम प्रधान उकरौली
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