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उत्तराखंड: चमेलिया नदी ने मचाई तबाही तो पिथौरागढ़ से चंपावत तक 50 हजार लोगों की जान होगी सांसत में, पढ़ें खबर

Sat, 05 Sep 2026 11:59 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Sat, 05 Sep 2026 11:59 AM IST
सार
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नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से चमेलिया नदी पर बनी झील भारतीय सीमा से 40 किमी दूर है। यह झील महाकाली नदी में मिलती है, जो भारत-नेपाल की सीमा है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए भारतीय सीमावर्ती इलाकों में जलस्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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Chamelia river: Nepal lake threatens to flood Uttarakhand
नेपाल के भट्टाड़ में भूस्खलन से चमेलिया नदी का रुका प्रवाह और बनने लगी कृत्रिम झील। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल के दार्चुला जिले के भट्टार में भूस्खलन से जिस जगह झील बनी है उस स्थान की भारतीय क्षेत्र से हवाई दूरी करीब 40 किलोमीटर है। इस वजह से भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। चिंता की बात इसलिए ज्यादा है कि चमेलिया नदी आगे आकर महाकाली नदी से मिलती है। महाकाली नदी ही दोनों देशों की सीमा तय करती है।

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पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अनुसार काली नदी कालापानी से टनकपुर तक नेपाल के साथ सीमा बनाती है और आगे शारदा के नाम से मैदानों की ओर जाती है। भारत की ओर महाकाली का प्रवाह धारचूला, जौलजीबी और झूलाघाट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ा है।
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चिंता की वजह

  • धारचूला : महाकाली पर भारत का प्रमुख सीमावर्ती शहर
  • जौलजीबी और झूलाघाट : आगे के संवेदनशील सीमा क्षेत्र
  • भट्टार : महाकाली निगरानी केंद्र से हवाई दूरी करीब 40 किमी

चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है काली
धारचूला क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद काली नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर है और यह 888.90 मीटर पर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा, झूलाघाट सहित अन्य स्थानों पर किनारे बसी आबादी में दहशत है। प्रशासन ने भी सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है


चमेलिया नदी ने मचाई तबाही तो पिथौरागढ़ से चंपावत तक 50 हजार लोगों की जान होगी सांसत में
यदि रसुवा की तरह तबाही मची तो भारत में पिथौरागढ़ के गेठीगड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव, हल्दू और चंपावत के सीमा क्षेत्र से लगे गांवों से लेकर टनकपुर और नेपाल के वीनायक, सेरा, जेबली, जुलाघाट, ननतड़ी, खड्यानी, सतपाली की 50 हजार से अधिक की आबादी खतरे में आएगी। ऐसे में इन क्षेत्रों के लोग दहशत में हैं और सूचना मिलने के बाद उनकी नींद गायब हो गई है।


बनबसा बैराज पर लगातार चौथे दिन भी रहा रेड अलर्ट
शुक्रवार को बनबसा में शारदा नदी का जलस्तर दोपहर दो बजे 131334 क्यूसेक रहा। इससे पूर्व सुबह छह बजे नदी का जलस्तर 102342, आठ बजे 114906 10 बजे 118710, 12 बजे 125446, एक बजे 129582 क्यूसेक था। लगातार चार दिनों से बैराज पर से चार पहिया वाहनों के संचालन पर सुरक्षा के तहत रोक रही। बैराज प्रशासन के मुताबिक नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से कम होने पर ही बैराज पर से चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू हो सकेगा। पहली जून से क्षेत्र में अबतक 1180 एमएम वर्षा हो चुकी है। संवाद

पहाड़ी दरकने से घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क बंद
पिथौरागढ़ जिले में शुक्रवार देर शाम हुई बारिश के बाद घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी दरकने से आवाजाही ठप हो गई। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। दिल्ली से सुबह पिथौरागढ़ आने वाली बस भी फंस गई इससे यात्रियों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। सूचना पर जेसीबी भेजी गई लेकिन दरकते पहाड़ के बीच बोल्डर और मलबा हटाना चुनौती बन गया। ऐसे में देर रात तक भी सड़क नहीं खुल सकी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि जल्द सड़क को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

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