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Mathura नाव हादसे में बच जाती 10 लोगों की जान अगर...
वृंदावन के केसी घाट पर हुआ दर्दनाक हादसा अब कई सवाल छोड़ गया है लापरवाही, चेतावनी की अनदेखी और सिस्टम की नाकामी। यमुना की लहरों में डूबी इस घटना ने खुशियों से भरे एक धार्मिक सफर को मातम में बदल दिया।
इस हादसे के चश्मदीद तानिश की आंखों में आज भी वो मंजर ताजा है। कांपती आवाज में उन्होंने बताया, “सब लोग खुश थे, कीर्तन कर रहे थे। तभी नाव पुल की तरफ बढ़ने लगी। हमने कई बार नाविक को रोका, चार बार कहा… लेकिन उसने एक नहीं सुनी। पलक झपकते ही नाव पुल से टकराई और सब कुछ खत्म हो गया।”
दरअसल, पंजाब के लुधियाना, मोगा और आसपास के इलाकों से आए श्रद्धालु यमुना नदी में नाव की सवारी कर रहे थे। कुल 37 लोग एक मोटरबोट में सवार थे। शुरुआत में माहौल भक्ति और उल्लास से भरा था, लेकिन जैसे-जैसे नाव आगे बढ़ी, खतरे के संकेत मिलने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज हवा और अधिक सवारियों के कारण नाव अस्थिर हो रही थी। कुछ श्रद्धालुओं ने नाविक से स्पीड कम करने और नाव रोकने की गुजारिश भी की। यहां तक कि कुछ लोगों को दूसरी नाव में शिफ्ट भी किया गया, लेकिन नाविक का रवैया लापरवाह बना रहा।
हादसे के एक अन्य गवाह श्वेत जैन ने बताया कि यमुना में बने पांटून (पीपा) पुल को हटाया जा रहा था। जलस्तर बढ़ने के कारण ये ढांचे नदी में बह रहे थे। मोटरबोट दो बार इनसे टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर इतनी जोरदार थी कि नाव पलट गई।
हादसे के बाद का मंजर और भी भयावह था। नाव पलटते ही लोग पानी में गिरने लगे। कुछ लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन शुरुआती वक्त में कोई राहत नहीं पहुंची। तनिश ने बताया, “नाविक खुद नहीं कूदा, न ही उसने किसी को बचाने की कोशिश की। हम अपने लोगों को खुद ही खींचते रहे। हाथ छिल गए, लेकिन कई लोग हमारी आंखों के सामने डूब गए।”
हालांकि बाद में गोताखोर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस हादसे में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है। यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत पांटून पुल हटाने का काम चल रहा था, लेकिन वहां कोई सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया था। जेसीबी मशीनों से पुल के हिस्से हटाए जा रहे थे, जिससे नदी में अव्यवस्था और खतरा बढ़ गया था।
बताया जा रहा है कि इस चार दिन की धार्मिक यात्रा के लिए श्रद्धालुओं से 4500 रुपये प्रति व्यक्ति किराया लिया गया था। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और परिजन मथुरा के लिए रवाना हो चुके हैं।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन श्रद्धालुओं की जान गई, वे अगले दिन नंदगांव में फूल बंगला सजाने और भजन-कीर्तन करने वाले थे। सारी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन एक लापरवाही ने सब कुछ खत्म कर दिया।
अब सवाल यही है क्या इस हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा?
क्योंकि इस हादसे ने सिर्फ 10 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों की दुनिया हमेशा के लिए उजाड़ दी।
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