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भारत में ही बनेगी जैवलिन मिसाइल: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने किया बड़ा करार, बढ़ेगी सेना की मारक क्षमता
Mon, 31 Aug 2026 11:51 AM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 31 Aug 2026 11:51 AM IST
भारत और अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय सेना अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली हासिल करने जा रही है, जबकि भारत में इसके उत्पादन की संभावना भी मजबूत हुई है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जैवलिन ज्वाइंट वेंचर के बीच हुए समझौते से देश में मिसाइल के ऑल अप राउंड के सह-उत्पादन का रास्ता खुला है।
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जैवलिन मिसाइल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए समझौता किया है। वहीं, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जैवलिन ज्वाइंट वेंचर ने भारत में जेवलिन ऑल अप राउंड (एयूआर) के सह-उत्पादन को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। जैवलिन ज्वाइंट वेंचर रैथियॉन और लॉकहीड मार्टिन की साझेदारी है।
इस समझौते के बाद अब भारत में ही जैवलिन मिसाइलों का उत्पादन किया जा सकेगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद महत्वपूर्ण परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सशस्त्र बलों को मिली आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत इन मिसाइलों की खरीद की जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय सेना अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदेगी। यह खरीद ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को मिली आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत की गई है।
दोनों देशों के बीच हुआ क्या समझौता?
जैवलिन को दुनिया की चर्चित एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है। दोनों देशों के बीच करीब 292 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय सेना को करीब 60 जैवलिन एंटी-टैंक निर्देशित मिसाइलें मिलेंगी। यह खरीद आपातकालीन खरीद व्यवस्था के तहत की गई है। इसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों को अपनी सैन्य क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए जरूरी हथियार खरीदने की अनुमति दी गई है।
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टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जैवलिन ज्वाइंट वेंचर के बीच हुए समझौते के बाद अब जैवलिन मिसाइल का उत्पादन दोनों कंपनियां मिलकर भारत में ही करेंगी। भारत को जैवलिन सीमित संख्या में मिलेंगी, क्योंकि आपातकालीन खरीद व्यवस्था के तहत एक उपकरण के लिए 300 करोड़ रुपये तक की खरीद की जा सकती है।
अमेरिकी राजदूत ने पहले ही दिया था बड़ा संकेत
अमेरिका लंबे समय से भारत को जैवलिन मिसाइल देने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस खरीद को भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच जैवलिन के सह-उत्पादन की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।
नवंबर 2025 में अमेरिका के विदेश विभाग ने भारत को संभावित रूप से 100 जैवलिन प्रणालियां और 216 एक्सकैलिबर निर्देशित तोप गोले बेचने के लिए 93 मिलियन डॉलर की बिक्री को मंजूरी दी थी।
क्या है जैवलिन मिसाइल की खासियत?
जैवलिन को मुख्य रूप से टैंक और दूसरे बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह एक मध्यम दूरी की, कंधे से दागी जा सकने वाली और एक सैनिक द्वारा संचालित की जाने वाली मिसाइल प्रणाली है। इसकी सबसे बड़ी खासियत 'फायर एंड फॉरगेट' क्षमता है। इसका अर्थ है कि मिसाइल दागने के बाद सैनिक को लक्ष्य पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। इससे वह तुरंत स्थान बदल सकता है या सुरक्षित जगह ले सकता है।
कितनी है मारक क्षमता?
जैवलिन प्रणाली में दो प्रमुख हिस्से होते हैं। पहला कमांड लॉन्च यूनिट है, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरा मिसाइल वाला डिस्पोजेबल लॉन्च-ट्यूब असेंबली है। यह प्रणाली टैंकों के अलावा बंकर और अन्य मजबूत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में भी सक्षम है। इसकी अधिकतम मारक क्षमता 4,500 मीटर से ज्यादा बताई गई है।
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इस समझौते के बाद अब भारत में ही जैवलिन मिसाइलों का उत्पादन किया जा सकेगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद महत्वपूर्ण परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सशस्त्र बलों को मिली आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत इन मिसाइलों की खरीद की जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय सेना अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदेगी। यह खरीद ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को मिली आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत की गई है।
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दोनों देशों के बीच हुआ क्या समझौता?
जैवलिन को दुनिया की चर्चित एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है। दोनों देशों के बीच करीब 292 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय सेना को करीब 60 जैवलिन एंटी-टैंक निर्देशित मिसाइलें मिलेंगी। यह खरीद आपातकालीन खरीद व्यवस्था के तहत की गई है। इसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों को अपनी सैन्य क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए जरूरी हथियार खरीदने की अनुमति दी गई है।
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टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जैवलिन ज्वाइंट वेंचर के बीच हुए समझौते के बाद अब जैवलिन मिसाइल का उत्पादन दोनों कंपनियां मिलकर भारत में ही करेंगी। भारत को जैवलिन सीमित संख्या में मिलेंगी, क्योंकि आपातकालीन खरीद व्यवस्था के तहत एक उपकरण के लिए 300 करोड़ रुपये तक की खरीद की जा सकती है।
अमेरिकी राजदूत ने पहले ही दिया था बड़ा संकेत
अमेरिका लंबे समय से भारत को जैवलिन मिसाइल देने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस खरीद को भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच जैवलिन के सह-उत्पादन की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।
नवंबर 2025 में अमेरिका के विदेश विभाग ने भारत को संभावित रूप से 100 जैवलिन प्रणालियां और 216 एक्सकैलिबर निर्देशित तोप गोले बेचने के लिए 93 मिलियन डॉलर की बिक्री को मंजूरी दी थी।
क्या है जैवलिन मिसाइल की खासियत?
जैवलिन को मुख्य रूप से टैंक और दूसरे बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह एक मध्यम दूरी की, कंधे से दागी जा सकने वाली और एक सैनिक द्वारा संचालित की जाने वाली मिसाइल प्रणाली है। इसकी सबसे बड़ी खासियत 'फायर एंड फॉरगेट' क्षमता है। इसका अर्थ है कि मिसाइल दागने के बाद सैनिक को लक्ष्य पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। इससे वह तुरंत स्थान बदल सकता है या सुरक्षित जगह ले सकता है।
कितनी है मारक क्षमता?
जैवलिन प्रणाली में दो प्रमुख हिस्से होते हैं। पहला कमांड लॉन्च यूनिट है, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरा मिसाइल वाला डिस्पोजेबल लॉन्च-ट्यूब असेंबली है। यह प्रणाली टैंकों के अलावा बंकर और अन्य मजबूत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में भी सक्षम है। इसकी अधिकतम मारक क्षमता 4,500 मीटर से ज्यादा बताई गई है।