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Published by: Adarsh Jha
Updated Wed, 07 Oct 2026 09:38 PM IST
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रेजीनगर उपचुनाव में पुलिस के साथ तीखी झड़प और गिरफ्तारी के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के प्रमुख और नाओदा से विधायक हुमायूं कबीर का गुस्सा अब विधानसभा तक पहुंच गया है। गिरफ्तारी के एक दिन बाद मीडिया के सामने आए हुमायूं कबीर भावुक भी हुए और उन्होंने विधानसभा से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया।
हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं, तब तक वह विधानसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा के किसी भी सत्र में शामिल नहीं होंगे। इतना ही नहीं, कबीर ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने तक का संकेत दे दिया है।
हुमायूं कबीर ने कहा कि वह नाओदा की जनता से माफी मांगेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो अपने राजनीतिक जीवन से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नाओदा के लोगों की सेवा का काम वह जारी रखेंगे।
दरअसल, पूरा विवाद रेजीनगर उपचुनाव के दौरान शुरू हुआ। मंगलवार को रेजीनगर में वोटिंग हो रही थी। इसी दौरान हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन पर आरोप लगाया गया कि वह बिना अनुमति एक मतदान केंद्र से दूसरे मतदान केंद्र जा रहे थे, मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे और पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी कर रहे थे।
आरोप यह भी है कि हुमायूं कबीर ने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्हें रेजीनगर थाने में करीब 12 घंटे रखा गया और बाद में रिहा कर दिया गया।
हुमायूं कबीर ने अपनी हिरासत को लेकर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी विधायक को बिना ठोस वजह के इस तरह 12 घंटे तक हिरासत में रखा जा सकता है?
कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास पुलिस विभाग भी है और वह ऐसे पुलिस मंत्री की दया पर राजनीति नहीं करेंगे।
लेकिन इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प बात है। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा और रेजीनगर, दोनों सीटों से चुनाव जीते थे। बाद में उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखने का फैसला किया और रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से रेजीनगर में उपचुनाव कराया गया।
इस उपचुनाव में हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद एजेयूपी के उम्मीदवार हैं। मतदान के दौरान पिता की गिरफ्तारी के बाद अब हुमायूं कबीर ने विधानसभा से दूरी बनाने का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनकी आरक्षित 88 नंबर की सीट अब खाली रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह विधानसभा की अल्पसंख्यक मामलों की समिति, सदन की दूसरी समितियों, कार्य सलाहकार समिति, सर्वदलीय बैठकों और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई जाने वाली बैठकों में भी शामिल नहीं होंगे।
कबीर ने यहां तक कहा कि अगर नाओदा की जनता उनसे कहेगी तो वह विधायक पद भी छोड़ सकते हैं और सक्रिय राजनीति से भी दूरी बना सकते हैं।
यानी रेजीनगर में एक दिन की गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का राजनीतिक रुख काफी सख्त हो गया है। अब वह विधानसभा से दूरी बनाने की बात कह रहे हैं और अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला नाओदा की जनता पर छोड़ रहे हैं।
साथ ही, रेजीनगर उपचुनाव के नतीजे पर भी सबकी नजर है। हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर बीजेपी जीत हासिल करेगी। अब सवाल यही है कि उपचुनाव का नतीजा क्या आता है और क्या हुमायूं कबीर का राजनीतिक भविष्य इस नतीजे से कोई नया मोड़ लेता है?
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