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पंजाब में कर्मचारियों की महाहड़ताल, मान सरकार हुई सख्त
पंजाब में वीरवार को महाहड़ताल के दौरान सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की संभावनाएं और बढ़ती दिख रही हैं। कर्मचारी व पेंशनर्स जत्थेबंदियों की साझा समन्वय समिति के साथ तय बैठक से सीएम भगवंत सिंह मान का इन्कार और सरकार की ओर से कर्मचारियों पर सख्ती की तैयारी से दोनों पक्षों में तालमेल के आसार कम हैं। कर्मचारी नेताओं ने एलान कर दिया है कि वे अपना बनता हक लेकर रहेंगे। 30 अगस्त को लुधियाना में साझा समन्वय समिति की बैठक होगी, जिसमें कर्मचारी आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा करेंगे, जबकि 28 और 29 अगस्त को सभी ब्लॉक व तहसील स्तर पर सरकार के पुतले फूंके जाने का एलान किया है।
बकाया डीए, पुरानी पेंशन बहाली समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में वीरवार को समिति ने पूरे पंजाब में सरकारी कामकाज ठप कर महाहड़ताल का आह्वान किया था। यह हड़ताल काफी हद तक सफल रही। ओपीडी सेवाएं भी बंद रखी गईं, जबकि शिक्षकों ने भी हड़ताल को समर्थन दिया। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा किसी भी प्रकार की इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं की गई थीं।
इसी बीच कर्मचारियों से बातचीत करने के लिए सीएम भगवंत सिंह मान ने जालंधर में कर्मचारी नेताओं की बैठक बुलाई थी। वीरवार दोपहर को होने वाली बैठक से पहले सीएम मान ने अचानक एक्स पर पोस्ट कर कहा- कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज चिंता को सुनने के लिए हम तैयार हैं
लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं। सरकार हर मुद्दे का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी, जब हड़ताल वापस ली जाएगी।
इसी दौरान पंजाब में कर्मचारियों की महाहड़ताल के बीच सरकार ने ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। दोपहर बाद कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर वीरवार को कार्यदिवस समाप्त होने तक सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की गैरहाजिरी से आम जनता को भारी असुविधा हुई है। सीएम के पोस्ट और कार्मिक विभाग के निर्देशों के बाद कर्मचारी और बिफर गए। उधर, विभागों ने कर्मचारियों के नामों की फेहरिस्त कार्मिक शाखा को भेजनी शुरू कर दी है।
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