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Over 40 bridges and roads destroyed in Nepal; help sought from India and China!
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नेपाल में 40 से ज्यादा पुल- सड़कें तबाह, भारत- चीन से लगाई मदद की गुहार!
नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने सड़क और पुलों के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थिति को देखते हुए नेपाल ने भारत और चीन, दोनों देशों से अस्थायी पुल उपलब्ध कराने की मांग की है। दोनों देशों की ओर से इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। द काठमांडू पोस्ट की मंगलवार की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने मुस्तांग जिले में स्थित कोराला बॉर्डर क्रॉसिंग के लिए 100 मीटर लंबे दो बेली पुल पहले ही भेज दिए हैं। इन अस्थायी पुलों के जरिए बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में यातायात और जरूरी सामान की आवाजाही बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नेपाल के सड़क विभाग के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन से देश की सड़कों और पुलों को करीब 30 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर लगभग 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के परिवहन नेटवर्क को कितनी गंभीर क्षति पहुंचाई है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट जाने के कारण लोगों की आवाजाही के साथ-साथ राहत और बचाव अभियान भी प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ का सबसे बड़ा असर रसुवा और चितवन के बीच सड़क संपर्क पर पड़ा है। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले 41 पुल पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि चार अन्य पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस कॉरिडोर पर कुल 63 पुल मौजूद थे, लेकिन बाढ़ के बाद इनमें से केवल 18 पुल ही सुरक्षित बचे हैं। बड़ी संख्या में पुलों के बह जाने से यह महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
रसुवा जिले में भी बाढ़ ने नुवाकोट के साथ सड़क संपर्क काट दिया है। इसके अलावा फुरके खोला पर बना कंक्रीट का पुल भी पूरी तरह नष्ट हो गया। पुल के टूटने से धाडिंग जिले के मुख्यालय धाडिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच सीधा संपर्क बाधित हो गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें पैदा हो रही हैं।
ऐसे हालात में अस्थायी बेली पुल नेपाल के लिए तत्काल राहत का महत्वपूर्ण साधन साबित हो सकते हैं। स्थायी पुलों के निर्माण में लंबा समय और भारी धनराशि लग सकती है, जबकि अस्थायी पुलों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सकता है। भारत और चीन से मिलने वाली इस सहायता से नेपाल को राहत एवं पुनर्निर्माण अभियान को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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