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बांग्लादेश: वेतन बढ़ाने की मांग पर कपड़ा मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, पुलिस से झड़प के बाद 100+ फैक्ट्रियां बंद
Thu, 05 Nov 2026 09:38 AM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 05 Nov 2026 09:38 AM IST
बांग्लादेश में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। मजदूर 12,500 टका से बढ़ाकर 30 हजार टका मासिक वेतन करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस से झड़प के बाद कई लोग घायल हुए और सैकड़ों फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया।
बांग्लादेश में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। मजदूर 12,500 टका से बढ़ाकर 30 हजार टका मासिक वेतन करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस से झड़प के बाद कई लोग घायल हुए और सैकड़ों फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया।
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बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बांग्लादेश में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा उद्योग के मजदूरों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। बुधवार को राजधानी ढाका और आसपास के औद्योगिक इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। हालात संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। कई दिनों से जारी आंदोलन के कारण देश की सैकड़ों गारमेंट फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया है।
मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। उनका कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। लगातार विरोध के चलते बांग्लादेश के प्रमुख कपड़ा औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े मजदूर
बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, जो ग्रामीण इलाकों से आकर फैक्ट्रियों में रोजगार करती हैं। मजदूरों का कहना है कि मौजूदा 12,500 टका का न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ती महंगाई के बीच पर्याप्त नहीं है। इसलिए वे इसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, आवास और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में मौजूदा वेतन से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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ढाका के आसपास कई औद्योगिक इलाकों में हिंसक झड़प
कई दिनों से राजधानी ढाका में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आंदोलन बुधवार को आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। नारायणगंज जिले के फतुल्लाह इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कई दर्जन लोग घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, पुलिस ने फतुल्लाह में कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया। वहीं, गाजीपुर जिले में मजदूरों ने एक प्रमुख राजमार्ग को जाम कर दिया। इससे यातायात पर भी असर पड़ा।
अशुलिया में करीब 100 फैक्ट्रियां बंद
मजदूर आंदोलन का असर बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। ढाका के पास सावर क्षेत्र के अशुलिया में करीब 100 फैक्ट्रियां बंद रहीं। अशुलिया इंडस्ट्रियल पुलिस के अधीक्षक मोमिनुल इस्लाम भुइयां ने बताया कि इलाके में लगभग 100 कारखानों का कामकाज बंद है। वहीं, राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। यह क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से मजदूरों के विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
40 अरब डॉलर का है बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा और परिधान उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस उद्योग से देश को सालाना करीब 40 अरब डॉलर का निर्यात राजस्व मिलता है। देश में लगभग 2,500 गारमेंट फैक्ट्रियां हैं और करीब 40 लाख कर्मचारी इस क्षेत्र से जुड़े हैं। ऐसे में मजदूरों का आंदोलन और फैक्ट्रियों का बंद होना उद्योग के उत्पादन और निर्यात गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने बनाया नया वेतन बोर्ड
मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग के बीच बांग्लादेश सरकार ने नया वेतन बोर्ड गठित किया है। इस बोर्ड को कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने की जिम्मेदारी दी गई है। वेतन बोर्ड के अध्यक्ष सैयद आजाद सुब्हानी ने कहा कि नए वेतनमान के तहत कर्मचारियों को जनवरी में पहली सैलरी मिलेगी।
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मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। उनका कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। लगातार विरोध के चलते बांग्लादेश के प्रमुख कपड़ा औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
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30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े मजदूर
बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, जो ग्रामीण इलाकों से आकर फैक्ट्रियों में रोजगार करती हैं। मजदूरों का कहना है कि मौजूदा 12,500 टका का न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ती महंगाई के बीच पर्याप्त नहीं है। इसलिए वे इसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, आवास और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में मौजूदा वेतन से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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ढाका के आसपास कई औद्योगिक इलाकों में हिंसक झड़प
कई दिनों से राजधानी ढाका में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आंदोलन बुधवार को आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। नारायणगंज जिले के फतुल्लाह इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कई दर्जन लोग घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, पुलिस ने फतुल्लाह में कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया। वहीं, गाजीपुर जिले में मजदूरों ने एक प्रमुख राजमार्ग को जाम कर दिया। इससे यातायात पर भी असर पड़ा।
अशुलिया में करीब 100 फैक्ट्रियां बंद
मजदूर आंदोलन का असर बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। ढाका के पास सावर क्षेत्र के अशुलिया में करीब 100 फैक्ट्रियां बंद रहीं। अशुलिया इंडस्ट्रियल पुलिस के अधीक्षक मोमिनुल इस्लाम भुइयां ने बताया कि इलाके में लगभग 100 कारखानों का कामकाज बंद है। वहीं, राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। यह क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से मजदूरों के विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
40 अरब डॉलर का है बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा और परिधान उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस उद्योग से देश को सालाना करीब 40 अरब डॉलर का निर्यात राजस्व मिलता है। देश में लगभग 2,500 गारमेंट फैक्ट्रियां हैं और करीब 40 लाख कर्मचारी इस क्षेत्र से जुड़े हैं। ऐसे में मजदूरों का आंदोलन और फैक्ट्रियों का बंद होना उद्योग के उत्पादन और निर्यात गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने बनाया नया वेतन बोर्ड
मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग के बीच बांग्लादेश सरकार ने नया वेतन बोर्ड गठित किया है। इस बोर्ड को कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने की जिम्मेदारी दी गई है। वेतन बोर्ड के अध्यक्ष सैयद आजाद सुब्हानी ने कहा कि नए वेतनमान के तहत कर्मचारियों को जनवरी में पहली सैलरी मिलेगी।